हरियाणा डेस्क। हरियाणा में आने वाले महीनों में राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा मतदाता सूची का सत्यापन बनने जा रहा है। भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) लागू करने का ऐलान किया है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य के करीब 2 करोड़ 6 लाख मतदाताओं का दोबारा सत्यापन किया जाएगा।

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 21 जुलाई को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी, जबकि अंतिम निर्वाचक नामावली 22 सितंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

25 लाख मतदाता संदिग्ध श्रेणी में, बढ़ी राजनीतिक हलचल

प्रदेश में करीब 25 लाख मतदाताओं को संदिग्ध श्रेणी में माना जा रहा है। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वोट कट सकते हैं। इसी वजह से इस अभियान को हरियाणा का अब तक का सबसे बड़ा ‘वोटर ऑडिट’ कहा जा रहा है।

एसआईआर की टाइमिंग ने राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है। अक्टूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस लगातार भाजपा पर वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाती रही है।

राहुल गांधी ने उठाए थे वोट गड़बड़ी के सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने ‘एच फाइल्स’ नाम से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हरियाणा चुनावों में करीब 25 लाख वोटों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। कांग्रेस का दावा था कि मतदाता सूची में बड़े स्तर पर हेरफेर हुआ है।

प्रदेश कांग्रेस ने ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान भी चलाया था। पार्टी लगातार चुनाव आयोग और भाजपा सरकार पर सवाल उठाती रही है। अब जब चुनाव आयोग खुद व्यापक सत्यापन अभियान शुरू कर रहा है, तो इसे कांग्रेस के आरोपों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाना है, ताकि फर्जी, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।

क्या है एसआईआर?

एसआईआर यानी स्पेशल इनटेंसिव रिवीजन (विशेष गहन पुनरीक्षण) चुनाव आयोग की एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट किया जाता है।

इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से:

मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं
डुप्लीकेट वोट खत्म किए जाते हैं
दूसरे स्थान पर शिफ्ट हो चुके मतदाताओं का सत्यापन किया जाता है
नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं
गलत प्रविष्टियों में सुधार किया जाता है

चुनाव आयोग का कहना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी। हालांकि विपक्षी दल और सामाजिक संगठन इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि कहीं वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से सूची से बाहर न हो जाएं।

घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ

एसआईआर प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन होगा। बीएलओ हर घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन करेंगे। इस दौरान मतदाताओं को पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज दिखाने पड़ सकते हैं।

राजनीतिक दलों के बीएलए यानी बूथ लेवल एजेंट्स भी मतदाता सूची की जांच करेंगे और संभावित गड़बड़ियों पर आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। ऐसे में बूथ स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां काफी बढ़ने की संभावना है।

एसआईआर प्रक्रिया का पूरा कार्यक्रम

चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार एसआईआर प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी:

5 जून से 14 जून: अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग तथा वोटर लिस्ट प्रिंटिंग
15 जून से 14 जुलाई: बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन
21 जुलाई: प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन
21 जुलाई से 20 अगस्त: नए नाम जोड़ने, हटाने और सुधार के लिए आवेदन
फॉर्म-6: नया नाम जोड़ने के लिए
फॉर्म-7: नाम हटाने के लिए
फॉर्म-8: सुधार के लिए

दावों और आपत्तियों पर ईआरओ और एईआरओ अधिकारी सुनवाई कर फैसला देंगे। इसके बाद 22 सितंबर 2026 को अंतिम निर्वाचक नामावली जारी की जाएगी।