चंडीगढ़। हरियाणा की पहचान भले ही आर्थिक रूप से मजबूत राज्य और दूध-दही की समृद्ध परंपरा वाले प्रदेश के तौर पर होती हो, लेकिन महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के पोषण से जुड़े आंकड़े एक अलग तस्वीर सामने रखते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में करीब 62 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया और पोषण संबंधी समस्याओं से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह सिर्फ स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव बच्चों के विकास और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

किशोरियों में खून की कमी बनी बड़ी चुनौती

किशोरावस्था में शरीर के विकास के लिए पर्याप्त आयरन और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत होती है। हरियाणा में बड़ी संख्या में किशोरियों में आयरन की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। पोषण की कमी का असर शारीरिक विकास, ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ सकता है।

सरकार की ओर से किशोरियों को आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां देने, पोषण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में रियायती सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने जैसी पहल की जा रही हैं। इसके साथ ही परिवारों में संतुलित और पौष्टिक भोजन को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

गर्भावस्था में पोषण पर विशेष जोर

महिलाओं में एनीमिया की समस्या गर्भावस्था के दौरान अधिक गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक गर्भावस्था में पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले बच्चे के जन्म जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

इसी को देखते हुए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। वहीं स्वास्थ्य अभियानों के माध्यम से एनीमिया की पहचान, उपचार और टीकाकरण जैसी सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।

बच्चों के विकास पर भी पड़ रहा असर

महिलाओं और माताओं के पोषण का सीधा संबंध बच्चों के स्वास्थ्य से भी माना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में पांच वर्ष तक के करीब 29.4 प्रतिशत बच्चों का वजन उम्र के मानकों के मुकाबले कम है, जबकि लगभग 21.2 प्रतिशत बच्चों में शारीरिक कमजोरी की स्थिति बताई गई है।

वहीं करीब एक तिहाई बच्चों का कद सामान्य से कम होने की बात सामने आती है। इन आंकड़ों को देखते हुए बच्चों के शारीरिक विकास और शुरुआती उम्र में पोषण को लेकर विशेष प्रयासों की जरूरत महसूस की जा रही है।

पोषण सुधार के लिए बहु-विभागीय रणनीति

हरियाणा सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए राज्य पोषण नीति के तहत कई विभागों को एक साथ जोड़कर रणनीति तैयार की है। राज्य पोषण परिषद और राज्य पोषण मिशन के जरिए गांव से लेकर जिला स्तर तक पोषण संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।

आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन-ए, आयोडीन और जिंक जैसे जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य पोषण सेवाओं को केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर प्रभावी बनाना है।

10.89 लाख बच्चों को मिल रहा पूरक पोषण

समेकित बाल विकास सेवा यानी ICDS के माध्यम से प्रदेश में लगभग 10.89 लाख बच्चों और करीब 3.08 लाख गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं तक पूरक पोषण पहुंचाया जा रहा है।

पोषण व्यवस्था के तहत अलग-अलग श्रेणियों के लाभार्थियों के लिए कैलोरी और प्रोटीन की जरूरत के अनुसार आहार उपलब्ध कराया जाता है। गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए प्रतिदिन करीब 600 कैलोरी और 18 से 20 ग्राम प्रोटीन का प्रावधान है। सामान्य बच्चों के लिए करीब 500 कैलोरी और 12 से 15 ग्राम प्रोटीन, जबकि कुपोषित बच्चों के लिए करीब 800 कैलोरी और 20 से 25 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

फोर्टिफाइड खाद्य सामग्री से पोषण सुधार की कोशिश

आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से डबल फोर्टिफाइड नमक और फोर्टिफाइड पंजीरी उपलब्ध कराई जा रही है। कई जिलों में हैफेड के माध्यम से फोर्टिफाइड आटा भी वितरित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भोजन के जरिए शरीर में जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को कम करना है।

पोषण अभियान से गांवों तक पहुंची पहल

केंद्र सरकार के पोषण अभियान की शुरुआत वर्ष 2018 में बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण स्तर में सुधार के उद्देश्य से की गई थी। हरियाणा में अभियान को चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग जिलों में लागू किया गया और बाद में प्रदेश के सभी जिलों को इसके दायरे में लाया गया।

संतुलित आहार और जागरूकता पर जोर

विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी योजनाओं के साथ परिवार और स्कूल स्तर पर पोषण जागरूकता भी जरूरी है। भोजन में दाल, दूध, हरी सब्जियां, मौसमी फल और आयरन व प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। नियमित स्वास्थ्य जांच और जरूरत पड़ने पर आयरन-फोलिक एसिड जैसे सप्लीमेंट का सेवन भी स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।

हरियाणा में पोषण से जुड़ी चुनौती का समाधान केवल योजनाओं के विस्तार से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और परिवारों में खानपान को लेकर जागरूकता बढ़ाने से संभव होगा। महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार को राज्य के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m