दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास (Saurav Das) और आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) को सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर मौखिक रूप से नसीहत दी। कोर्ट ने कहा कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी व्यक्ति पर इस तरह हमला करना उचित नहीं है। अदालत ने दोनों नेताओं से अपने स्तर पर गौरव भाटिया (Gaurav Bhatia) से संबंधित विवादित पोस्ट हटाने पर विचार करने को कहा। मामला भाजपा प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की ओर से दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है। भाटिया ने CJP के अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ 2 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
कोर्ट ने भाटिया से पूछा- अभिजीत दीपके का नाम क्यों?
सुनवाई के दौरान अदालत ने गौरव भाटिया से सीधे सवाल किया कि इस मामले में CJP नेता अभिजीत दीपके का नाम प्रतिवादियों में क्यों शामिल किया गया है। इस पर दीपके की ओर से कहा गया कि उन्होंने भाटिया के संबंध में कोई पोस्ट नहीं किया था और इसलिए उन्हें मामले से बाहर किया जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
गौरव भाटिया ने 5 सितंबर को एक्स पर सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई थी। यह पोस्ट CJP के एक नाबालिग प्रदर्शनकारी पर कथित हमले के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद किया गया था। भाटिया की याचिका के मुताबिक, संबंधित पोस्ट AI की मदद से तैयार किया गया एक फर्जी ट्वीट था। इसमें गौरव भाटिया के नाम से कथित तौर पर यह दावा किया गया था कि उन्होंने स्वतंत्र भारद्वाज को ‘दिमागी नक्सली’ और ‘जातिवादी’ कहा था। भाटिया का कहना है कि यह मामला महज उनकी किसी टिप्पणी की आलोचना या उससे असहमति जताने तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि उन्हें ऐसे बयान से जोड़ दिया गया, जो उन्होंने कभी दिया ही नहीं था।
कोर्ट ने क्या कहा?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि विरोध जताने के कई तरीके हो सकते हैं। सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर इशारा करते हुए अदालत ने कहा कि बिना किसी तथ्य की पुष्टि किए इस तरह किसी व्यक्ति पर हमला करना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों नेता खुद संबंधित पोस्ट हटाने के लिए तैयार हैं और इस संबंध में अपना जवाब दाखिल करते हैं, तो अदालत फिलहाल पोस्ट हटाने का आदेश जारी नहीं करना चाहती। इस दौरान सौरव दास की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित ट्वीट पहले ही डिलीट किया जा चुका है। इस पर कोर्ट ने कहा कि एक अन्य सामग्री भी पोस्ट की गई थी। अदालत ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और अभिव्यक्ति का अधिकार है, लेकिन कई बार अपनी बात को अधिक स्पष्ट और उचित तरीके से रखना जरूरी होता है, ताकि उसकी मंशा सही तरीके से सामने आए।
आपके पास अपनी बात रखने का अधिकार है’
अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों को अपनी बात रखने और अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन इसे इस तरह व्यक्त किया जाना चाहिए कि उसका आशय और मंशा स्पष्ट रूप से सामने आए। कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका के वकील से अपने मुवक्किलों से निर्देश लेकर अगली सुनवाई में जानकारी देने को कहा। अदालत ने दोनों नेताओं की उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि वे अभी युवा हैं और उनके सामने लंबा करियर है। ऐसे में उन्हें अदालतों में समय बिताने के बजाय मामले को उचित तरीके से सुलझाने पर विचार करना चाहिए।
कोर्ट ने क्यों कहा- ‘अदालत आने की जरूरत क्यों?’
सुनवाई के दौरान अदालत ने गौरव भाटिया को भी मामले से निपटने के दूसरे तरीकों पर विचार करने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि मानहानि का मुकदमा दायर करने के लिए सीधे अदालत आने के बजाय पहले संबंधित लोगों से संपर्क कर मामले को सुलझाने की कोशिश की जा सकती थी। वहीं, अदालत ने CJP नेताओं के वकीलों से भी कहा कि वे अपने मुवक्किलों से निर्देश लेकर बताएं कि क्या वे विवादित पोस्ट खुद हटाने और अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए तैयार हैं।
गौरव भाटिया ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान गौरव भाटिया ने अदालत से कहा कि यह ‘गंभीर मानहानि’ का मामला है और इस तरह की पोस्ट इंटरनेट पर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पोस्ट करने वाले लोगों के लाखों फॉलोअर्स हैं और ऐसी सामग्री से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंच रहा है। भाटिया ने यह भी कहा कि उन्होंने संबंधित लोगों को पोस्ट हटाने और मामले को सुलझाने का मौका दिया था। भाटिया ने खुद को कानून का पालन करने वाला नागरिक बताते हुए आरोप लगाया कि दूसरी तरफ से तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई और उसे विश्वसनीय दिखाने के लिए उस पर एक समाचार एजेंसी का लोगो भी लगाया गया।
CJP और अभिजीत दीपके को लेकर कोर्ट का सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल किया कि अभिजीत दीपके और CJP को इस मामले में पक्षकार क्यों बनाया गया है और उनकी ओर से ऐसा क्या किया गया, जिसके आधार पर उन्हें याचिका में शामिल किया गया। अभिजीत दीपके के वकील ने अदालत को बताया कि दीपके की ओर से गौरव भाटिया के संबंध में एक भी ट्वीट नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि याचिका में मांगी गई राहत भी मुख्य रूप से सौरव दास और आशुतोष रांका से संबंधित है। इस पर भाटिया की ओर से दलील दी गई कि मामला केवल एक ट्वीट तक सीमित नहीं है। उनका कहना था कि यह एक ऐसे पूरे तंत्र से जुड़ा मामला है, जिसमें फर्जी तस्वीर के इस्तेमाल पर आपत्ति जताने वाले व्यक्ति को निशाना बनाया जा रहा है।
2 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा
गौरव भाटिया की ओर से दायर 2 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि CJP और उसके नेता लगातार ऐसे सार्वजनिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट करते रहे हैं, जिनके जरिए न्यायपालिका की गरिमा, अधिकार और संस्थागत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। याचिका में सौरव दास की कुछ अन्य सोशल मीडिया पोस्ट का भी हवाला दिया गया है। इनमें न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ की गई कथित टिप्पणी और उमर खालिद की कैद से संबंधित ट्वीट का उल्लेख शामिल है।याचिका में आरोप लगाया गया है कि सौरव दास और अन्य प्रतिवादी सोशल मीडिया पर न्यायपालिका की आलोचना करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनकी टिप्पणियां संस्थागत स्तर पर न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाली हैं। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका के वकील को अपने मुवक्किलों से निर्देश लेने के बाद वापस आने को कहा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित विवादित पोस्ट खुद हटा दिए जाते हैं, तो फिलहाल अदालत की ओर से अलग से टेकडाउन आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m



