अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले से सामने आए कथित फर्जी डॉक्टर मामले ने अब प्रदेश की राजनीति और स्वास्थ्य विभाग में भूचाल ला दिया है। रीवा लोकायुक्त द्वारा रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए कथित डॉक्टर महेश चंद्र शर्मा प्रकरण में अब डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला का बड़ा बयान सामने आया है। मंत्री ने साफ कहा है कि प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के डिजिटलीकरण की वजह से ही इस तरह के फर्जीवाड़े उजागर हो रहे हैं और इस मामले में सिर्फ फर्जी डॉक्टर ही नहीं, बल्कि उसकी नियुक्ति, उपस्थिति और रिपोर्टिंग करने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रीवा लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद जांच में सामने आया कि जिस व्यक्ति को अब तक डॉ. महेश चंद्र शर्मा माना जा रहा था, वह कथित तौर पर राजस्थान के भरतपुर निवासी असली डॉक्टर के शैक्षणिक दस्तावेजों का दुरुपयोग कर मध्यप्रदेश में वर्षों से नौकरी कर रहा था। इतना ही नहीं उसके नाम पर शहडोल, श्योपुर और खरगोन, तीन जिलों में पदस्थापना दर्ज होने का मामला भी सामने आया, जिससे पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फर्जी तरीके से हासिल की नौकरी
इसी बीच असली डॉ. महेश चंद्र शर्मा स्वयं शहडोल पहुंचे और जयसिंहनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि उनके रिश्ते के चाचा सतीश शर्मा ने उनके शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से सरकारी नौकरी हासिल की। पुलिस अब शिकायत के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया में जुटी है।
डिप्टी सीएम बोले- अधिकारियों की जिम्मेदारी भी होगी तय
इस पूरे मामले पर डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में व्यापक स्तर पर डिजिटलीकरण किया गया है और उसी का परिणाम है कि ऐसे फर्जी मामलों का खुलासा हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर, सेवा समाप्ति और अब तक लिए गए वेतन की वसूली की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति वर्षों तक फर्जी तरीके से नौकरी करता रहा तो यह केवल उसकी गलती नहीं है। जिस ब्लॉक स्तर पर उसकी उपस्थिति दर्ज की गई, उसकी रिपोर्टिंग हुई और निगरानी में लापरवाही बरती गई, उन संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी खजाने का कितना नुकसान ?
फिलहाल यह मामला सिर्फ एक फर्जी डॉक्टर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था, नियुक्ति प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा सरकारी खजाने को कितना नुकसान पहुंचाया गया।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
वहीं इस पूरे मामले में शहडोल नवागत एसपी संजय कुमार अग्रवाल का कहना है कि इस संबंध में हमको जो शिकायत मिल रही है और राजस्थान से जो अधिकारी हमको बयान दे रहे है, उस शिकायत जांच पर कोई अपराध पाया जाता है तो कार्यवाही की जाएगी।
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