अभिषेक सेमर, तखतपुर। बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भरारी के शासकीय प्राथमिक शाला तेलियापुरान, संकुल केंद्र भरारी से एक मामला सामने आया है। यहां छोटे बच्चों से पानी से भरी भारी बाल्टी उठवाया गया, जिसका वीडियो भी आया है। वीडियो आने के बाद स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और उनसे इस तरह का काम कराए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि स्कूल के छोटे बच्चों से शौचालय में पानी भरकर ले जाने का काम कराया जा रहा था। सामने आई जानकारी के अनुसार, जिस बाल्टी में बच्चे पानी भरकर ले जा रहे थे, उसकी क्षमता करीब 15 से 20 लीटर बताई जा रही है। इतनी मात्रा में पानी छोटे बच्चों के लिए उठाकर ले जाना मुश्किल नजर आ रहा है।
मामले से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो में बच्चे पानी से भरी बाल्टी को उठाने में असमर्थ नजर आ रहे हैं। बाल्टी का वजन अधिक होने के कारण बच्चे उसे उठाने के बजाय जमीन पर रखकर खींचते हुए आगे ले जाते दिखाई दे रहे हैं।

बच्चों ने क्या बताया?
जब बच्चों से इस संबंध में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि “सर ने बाथरूम का दरवाजा खोलकर पानी भरकर आने और दरवाजा बंद कर देने के लिए कहा है।” बच्चों के अनुसार, उन्हें इसी तरह पानी भरकर ले जाने के लिए कहा गया था।

बच्चों से भारी बाल्टी उठवाने पर सवाल
मामला सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि प्राथमिक कक्षा में पढ़ने वाले छोटे बच्चों से इतनी भारी बाल्टी में पानी उठवाने की जरूरत क्यों पड़ी। क्या स्कूल में पानी या सफाई व्यवस्था के लिए कोई दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है? यदि बच्चों से इस तरह का काम कराया जा रहा है, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे कम उम्र के होते हैं। भारी वजन उठाने के दौरान उनके हाथ, पैर, कमर या शरीर के अन्य हिस्सों में चोट लगने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा पानी से भरी बाल्टी को जमीन पर खींचकर ले जाने के दौरान बच्चे के फिसलने का खतरा भी हो सकता है।
चिंता में अभिभावक और ग्रामीण
मामला सामने आने के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों के बीच भी चिंता का माहौल है। लोगों का कहना है कि स्कूल बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षित वातावरण के लिए होता है। ऐसे में बच्चों से इस तरह का शारीरिक काम कराया जाना उचित है या नहीं, इसकी जांच संबंधित अधिकारियों को करनी चाहिए।
हालांकि, इस पूरे मामले में स्कूल प्रबंधन या संबंधित शिक्षक का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा जांच किया जाना जरूरी है।
वहीं इस मामले को लेकर हमारे संवाददाता ने बीईओ दीपक कुमार गुप्ता से जानकारी लेने के लिए फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कॉल रिसीव नहीं किया गया। खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या पूरे घटनाक्रम की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है।
देखिये वीडियो-
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