चंडीगढ़। सीएम भगवंत मान और कैबिनेट मंत्रियों को पद से अयोग्य घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि रिट ऑफ क्वो वारंटो केवल तब ही जारी की जा सकती है, जब संबंधित व्यक्ति के पास सार्वजनिक पद ग्रहण करने की संवैधानिक या वैधानिक पात्रता ही न हो।
महज भ्रष्टाचार, कदाचार, अक्षमता या दुराचार के आरोप किसी याचिका का आधार नहीं बन सकते। कोर्ट ने आदेश में कहा कि याची वकील जगमोहन सिंह भट्टी ने सीएम सहित मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्ट आचरण, संविधान की भावना के विपरीत कार्य करने और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए, पर वह यह बताने में पूरी तरह विफल रहे कि आखिर इन जनप्रतिनिधियों में ऐसी कौन सी संवैधानिक या कानूनी खामी है, जिसके चलते उन्हें अपने पद पर बने रहने के अयोग्य ठहराया जाए।
खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट पहले भी प्रदीप सिंह एडवोकेट बनाम हरियाणा राज्य मामले में यह सिद्धांत स्पष्ट कर चुकी है कि क्वो वारंटो रिट का दायरा बेहद सीमित है। याचिका में पंजाब विस अध्यक्ष को मंत्रियों के खिलाफ अयोग्यता कार्रवाई शुरू करने, वित्तीय लाभरोकने और कथित खर्चों की रिकवरी कराने जैसी मांगें उठी थीं। कोर्ट ने दोटूक कहा, भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए अन्य वैधानिक उपाय उपलब्ध हो सकते हैं।
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