रांची। बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्यमंत्री ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी डिस्चार्ज पिटीशन खारिज कर दी गई थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ED को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

डिस्चार्ज खारिज होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे सीएम

हेमंत सोरेन की ओर से दायर याचिका में निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए राहत की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाई जाए और मामले में उनके खिलाफ आगे की न्यायिक कार्यवाही पर भी अंतरिम रोक लगाई जाए।

सुनवाई के दौरान पहले मुख्यमंत्री की ओर से अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें अदालत के सामने रखीं। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने ED से इस मामले में अपना जवाब मांगा।

ED रखेगी अपना पक्ष

ED की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरव कुमार ने अदालत में पक्ष रखा। अब जांच एजेंसी को याचिका पर विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत मुख्यमंत्री की मांग और निचली अदालत के आदेश से जुड़े पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी।

अभी नहीं मिली कोई अंतरिम राहत

हाईकोर्ट ने फिलहाल हेमंत सोरेन को मामले में कोई अंतिम अथवा अंतरिम राहत नहीं दी है। अदालत ने केवल ED को जवाब देने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय की है।

मामला बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच से संबंधित है। इसी प्रकरण में निचली अदालत से डिस्चार्ज की मांग खारिज होने के बाद मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।

16 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी। उस दिन ED की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद हाईकोर्ट याचिका पर आगे की सुनवाई करेगा। मुख्यमंत्री की ओर से मांगी गई अंतरिम राहत पर भी अदालत आगे विचार कर सकती है।फिलहाल हाईकोर्ट की ओर से मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है।