कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में भारी धांधली का आरोप लगाते हुए अपने मंत्रियों के साथ बेंगलुरु स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ECI) कार्यालय पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया. शिवकुमार ने साफ कहा कि जब तक उन्हें ठोस आश्वासन नहीं मिलता, वो वहीं बैठे रहेंगे.

मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि विधायक अभय पाटिल ने खुद चुनाव अधिकारी के पास आकर गलती मानी और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए फर्जी नाम हटाने का लिखित पत्र सौंपा. उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक निर्वाचन आयोग से ठोस आश्वासन नहीं मिलता और गड़बड़ी करने वालों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं होते, वह दफ्तर में ही धरने पर बैठे रहेंगे.

‘अभय पाटिल ने स्वीकार की गलती’

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने चुनाव आयोग कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि विधायक अभय पाटिल खुद चुनाव अधिकारी के सामने आए और उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की. पाटिल ने अधिकारियों के सामने माना कि उनसे गलत काम हुआ है. इसके बाद उन्होंने चुनाव अधिकारी को खुद पत्र सौंपकर आग्रह किया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा सूची में शामिल कराए गए नामों को तुरंत हटाया जाए.

शिवकुमार के इस रुख राज्य की राजनीति में नए टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है, खासकर तब जब विपक्ष और सत्तारूढ़ पक्ष के बीच चुनावी सूची और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है.

मुख्यमंत्री ने EC पर लगाए गंभीर आरोप

इससे पहले उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि जहां तक ​​कर्नाटक की बात है, नए SIR के बाद एक खास SIR शुरू किया गया है. कर्नाटक सरकार की ओर से हमने चुनाव आयोग का सहयोग किया… कर्नाटक में एक बड़ी साजिश चल रही है… 70% से ज्यादा बूथों पर हमने पाया है कि BJP के अलग-अलग नेता बिना किसी पहचान के ‘फॉर्म 7’ ले रहे हैं. पहले से छपे हुए फॉर्म सप्लाई किए गए हैं और वो BJP पार्टी के नेताओं को दिए जा रहे हैं.

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