हेमंत शर्मा, इंदौर। धार भोजशाला केस में सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में हुई सुनवाई ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब मामला खींचने की कोशिशें नहीं चलेंगी। कोर्ट ने दो अहम आवेदनों पर फैसला देते हुए साफ कहा – पुराने आदेशों के बाद नए विवाद खड़े करने की कोई गुंजाइश नहीं है। सबसे पहले इंटरवेनर की तरफ से ASI अधिकारियों के क्रॉस एग्जामिनेशन की मांग उठाई गई। लेकिन कोर्ट ने इस मांग को बिना घुमाए-फिराए खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही 1 अप्रैल के आदेश में ऐसी कोई छूट नहीं दे चुका है और हाईकोर्ट भी 21 अप्रैल को अपना रुख साफ कर चुका है। 

यानी साफ संदेश – अब बार-बार वही बात उठाकर केस को भटकाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी। इसके बाद दूसरा बड़ा मुद्दा सामने आया – ASI की वीडियोग्राफी। आरोप लगाया गया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद वीडियो तक नहीं दी गई। इस पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने कहा कि वीडियो पहले ही गूगल ड्राइव पर डालकर एक्सेस दिया जा चुका है। कोर्ट ने इस पर लंबी बहस में समय खराब करने के बजाय तुरंत एक्शन लिया। IT सेक्शन को निर्देश दिए गए कि उसी दिन वकील को वीडियोग्राफी दिखवाई जाए। साथ ही ASI को साफ आदेश – संबंधित ईमेल पर तुरंत एक्सेस दो। 

कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अब कोई बहाना नहीं चलेगा। प्रतिवादी पक्ष को 7 मई 2026 तक लिखित आपत्तियां दाखिल करनी होंगी और उसमें साफ-साफ बताना होगा कि किस फोल्डर और किस टाइमिंग पर आपत्ति है।सुनवाई के दौरान ASI की ओर से वरिष्ठ वकील ने अपनी दलीलें जारी रखीं। अब मामला 5 मई को फिर लगेगा। अगर ASI की बहस पूरी होती है, तो अगला नंबर दूसरे पक्ष का होगा। पूरी सुनवाई से एक बात बिल्कुल साफ है – कोर्ट अब इस केस को तेजी से निपटाना चाहता है। क्रॉस एग्जामिनेशन जैसी मांगों को किनारे कर दिया गया है और फोकस सीधे सबूतों और रिपोर्ट पर है। आने वाले दिनों में इस केस में बड़ा मोड़ देखने को मिल सकता है।

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