काजल, हिसार। तप की तपिश, साधना की शक्ति और श्रद्धा की आस्था से सृजित विश्व के सबसे बड़े महामृत्युंजय यंत्र का दिव्य द्वार अब हिसार में खुलने जा रहा है। मैय्यड़ स्थित ओम सिद्ध महामृत्युंजय अंतरराष्ट्रीय योग एवं ज्योतिष अनुसंधान केंद्र में 37 वर्षों की अखंड साधना से निर्मित इस यंत्र को 17 अगस्त, नागपंचमी के पावन अवसर पर आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा।
इस अवसर पर यंत्र पर पांच करोड़ बेलपत्र अर्पित किए जाएंगे। आयोजकों का दावा है कि इस महाअनुष्ठान के माध्यम से भारत देश का कालसर्प दोष दूर करने का आध्यात्मिक संकल्प लिया गया है। प्रयागराज में अस्थायी रूप से स्थापित किए जाने के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहे इस यंत्र की अब मैय्यड़ में स्थायी स्थापना की गई है।
तप से सिद्धि, साधना से सृजन… 37 साल में साकार हुआ संकल्प
शनिवार को अनुसंधान केंद्र में आयोजित प्रेस वार्ता में स्वामी सहजानंद महाराज ने कहा कि यह यंत्र उनके 37 वर्षों की अखंड साधना का साकार स्वरूप है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य केवल दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां श्रद्धालुओं को ध्यान, पूजा-पाठ, महामृत्युंजय साधना और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर उपलब्ध कराना है।
स्वामी सहजानंद महाराज ने इसे आध्यात्मिक चेतना और आत्मकल्याण का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस केंद्र के माध्यम से भारतीय ऋषि परंपरा, योग, ज्योतिष और आध्यात्मिक विज्ञान को एक ही मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रयागराज में करोड़ों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
स्वामी सहजानंद महाराज ने बताया कि विश्व के सबसे बड़े महामृत्युंजय यंत्र के निर्माण की यात्रा 37 वर्षों की साधना से पूरी हुई। इससे पहले इस यंत्र को प्रयागराज में अस्थायी रूप से स्थापित किया गया था, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं ने इसके दर्शन किए।
अब इस यंत्र को स्थायी रूप से मैय्यड़ स्थित ओम सिद्ध महामृत्युंजय अंतरराष्ट्रीय योग एवं ज्योतिष अनुसंधान केंद्र में स्थापित किया गया है। आयोजकों के अनुसार, यह अपनी तरह का पहला और विश्व का सबसे बड़ा महामृत्युंजय यंत्र है। इसके माध्यम से भारतीय ऋषि परंपरा, योग, ज्योतिष और आध्यात्मिक विज्ञान को एक ही मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
नागपंचमी पर आस्था का महासंगम, चढ़ेंगे पांच करोड़ बेलपत्र
17 अगस्त को नागपंचमी के अवसर पर महामृत्युंजय यंत्र के लोकार्पण के साथ पांच करोड़ बेलपत्र अर्पित करने का महाअनुष्ठान आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, बेलपत्रों का यह विशाल अर्पण धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
आयोजकों का दावा है कि इस महाअनुष्ठान के माध्यम से भारत देश के कालसर्प दोष को दूर करने का संकल्प लिया गया है। आयोजन के जरिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को महामृत्युंजय साधना, यंत्र-दर्शन और विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठानों से जोड़ने की तैयारी की गई है।
कालसर्प दोष से मुक्ति का संकल्प, देशभर से जुटेंगे श्रद्धालु
आयोजकों ने बताया कि नागपंचमी के दिन होने वाला पांच करोड़ बेलपत्रों का अर्पण केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक व्यापक आध्यात्मिक संकल्प के रूप में किया जा रहा है। उनके अनुसार, इस महाअर्पण का उद्देश्य भारत देश के कालसर्प दोष को दूर करने की आध्यात्मिक साधना करना है।
कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और इसे आस्था के बड़े आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं के हिसार पहुंचने की उम्मीद है।
33 अक्षरों में महामृत्युंजय मंत्र का आध्यात्मिक रहस्य
प्रेस वार्ता के दौरान स्वामी सहजानंद महाराज एवं एस्ट्रो प्रद्युमन ने महामृत्युंजय मंत्र के 33 अक्षरों के आध्यात्मिक एवं सांकेतिक महत्व की भी विस्तृत व्याख्या की।
उनके अनुसार, मंत्र के प्रत्येक अक्षर को मानव शरीर के एक ऊर्जा केंद्र और चेतना के एक विशेष आयाम से जुड़ा हुआ माना जाता है। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया गया कि मंत्र, यंत्र और ध्यान का संगम साधना को आत्मिक उन्नति की दिशा में ले जाने वाला माध्यम माना जाता है।

ध्यान, साधना और आध्यात्मिक शोध का बनेगा केंद्र
मैय्यड़ स्थित अनुसंधान केंद्र में श्रद्धालुओं के लिए ध्यान, मेडिटेशन, महामृत्युंजय साधना और पूजा-पाठ की व्यवस्था की जाएगी। स्वामी सहजानंद महाराज ने कहा कि केंद्र का उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं को यंत्र के दर्शन कराना नहीं है, बल्कि लोगों को तनावमुक्त, संतुलित और आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करना भी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह केंद्र राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आध्यात्मिक शोध और साधना का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को साधना, ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन के लिए वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।

चित्रों और पोस्टरों से समझाया मंत्र, यंत्र और ऊर्जा का संबंध
प्रेस वार्ता के दौरान विभिन्न चित्रों और पोस्टरों के माध्यम से महामृत्युंजय यंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, ध्यान, सूक्ष्म शरीर, 33 कोटि देवताओं की वैदिक अवधारणा, मंत्र विज्ञान तथा ऊर्जा प्रवाह जैसे विषयों की व्याख्या की गई।
वक्ताओं ने इन विषयों को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की व्याख्यात्मक प्रस्तुति बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को साधना की पद्धति और उसके आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराना है। इस दौरान मंत्र, यंत्र और ध्यान के बीच बताए जाने वाले आध्यात्मिक संबंध को भी विस्तार से समझाया गया।
प्रयागराज से मैय्यड़ तक… आस्था की धारा को मिला नया पड़ाव
37 वर्षों की तपस्या से निकला यह महामृत्युंजय यंत्र अब मैय्यड़ की धरती पर श्रद्धा का नया केंद्र बनने की ओर है। प्रयागराज से मैय्यड़ तक इसकी यात्रा आस्था की धारा के एक नए पड़ाव की कहानी है, जहां वर्षों की तपस्या ने आकार लिया, साधना ने स्वरूप पाया और अब नागपंचमी पर पांच करोड़ बेलपत्रों के अर्पण के साथ श्रद्धालुओं की आस्था इसे अपना स्पर्श देने जा रही है।
17 अगस्त को नागपंचमी के पावन अवसर पर जब इस यंत्र का दिव्य द्वार आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा, तब मैय्यड़ में धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन का बड़ा केंद्र देखने को मिलेगा। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन महामृत्युंजय साधना, ध्यान, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक चिंतन को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
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