कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़।हरियाणा की राजनीति एक बार फिर चौटाला परिवार के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। हिसार की हालिया घटना के बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बिखरा हुआ चौटाला परिवार फिर से एक मंच पर नजर आएगा। हालांकि 27 अप्रैल को हिसार में होने वाली महापंचायत में पूरे परिवार के एक मंच पर आने की अभी तक किसी तरह की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर कयासों का दौर लगातार तेज होता जा रहा है।
दरअसल, लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर चल रहे चौटाला परिवार को एकजुट करने की कोशिशें अंदरखाने तेज बताई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार किसान नेता राकेश टिकैत परिवार के बीच की दूरियों को कम करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे लगातार संवाद स्थापित कर रिश्तों में आई खटास को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि परिवार एक बार फिर राजनीतिक रूप से साथ आ सके।
क्या परिवार की ताकत दिखेगी मंच पर
इतना ही नहीं, जानकारी यह भी सामने आ रही है कि दुष्यंत चौटाला इन दिनों अपने पैतृक गांव चौटाला पहुंचे हुए हैं, जहां वे अपने चाचा और ताऊ से मुलाकात कर परिवार को मनाने की कोशिश में जुटे हैं। यह पहल कितनी सफल होती है, इसका असली संकेत सोमवार को होने वाली महापंचायत में ही मिल पाएगा, जहां सबकी नजर इस बात पर टिकी होगी कि परिवार एक मंच पर आता है या नहीं।
ये निभाएंगे ‘पर्दे के पीछे’ वाले चेहरे की भूमिका
वहीं किसान नेता राकेश टिकैत को इस पूरी कवायद का अहम ‘पर्दे के पीछे’ वाला चेहरा माना जा रहा है। चर्चा है कि टिकैत सीधे तौर पर सामने आए बिना, दोनों पक्षों के बीच तालमेल बनाने और माहौल तैयार करने में जुटे हुए हैं। हालांकि इसको लेकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है, लेकिन सियासी चर्चाओं में उनकी भूमिका को लगातार जोड़ा जा रहा है।
चौटाला परिवार, जिसकी राजनीतिक विरासत चौधरी देवी लाल से जुड़ी रही है, एक समय हरियाणा की राजनीति का केंद्र बिंदु हुआ करता था। लेकिन समय के साथ परिवार के भीतर मतभेद बढ़ते गए और चौधरी देवी लाल के बाद यह ताकत अलग-अलग धड़ों में बंटती चली गई। इसी बिखराव का असर प्रदेश की राजनीति पर भी साफ तौर पर देखने को मिला।
महापंचायत पर टिकी नजर
अब सबकी नजर 27 अप्रैल को होने वाली हिसार महापंचायत पर टिकी हुई है। सवाल यही है कि क्या यह आयोजन केवल एक सामान्य सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रम बनकर रह जाएगा, या फिर यह हरियाणा की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की भूमिका तैयार करेगा।
फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि चौटाला परिवार को लेकर बनी यह हलचल आने वाले समय में सियासी समीकरण बदलने की क्षमता रखती है।

