हिसार ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी द्वारा मातृ दिवस के उपलक्ष्य में एक शैक्षणिक सत्र और नाटक का आयोजन किया गया। इसमें हिसार, फतेहाबाद और टोहाना के 50 से अधिक डॉक्टरों ने भाग लेकर चिकित्सा उत्कृष्टता पर चर्चा की।

प्रवीण कुमार, हिसार। जिले में 11 मई को ‘हिसार ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी’ द्वारा मातृ दिवस के पावन अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य भाग के रूप में गर्भावस्था के दौरान होने वाली विभिन्न चिकित्सा संबंधी समस्याओं और उनके समाधान पर एक विस्तृत शैक्षणिक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में न केवल चिकित्सा विज्ञान के जटिल पहलुओं पर चर्चा हुई, बल्कि सत्र के समापन के उपरांत माताओं के सम्मान और उनके महत्व को दर्शाने के लिए एक प्रभावशाली नाटक की प्रस्तुति भी दी गई।

नैदानिक क्षेत्र में उत्कृष्टता और अकादमिक मंथन

इस आयोजन के मुख्य सत्र का विषय ‘नैदानिक क्षेत्र में उत्कृष्टता को पुनर्जीवित करना’ (Revitalizing Excellence in Clinical Practice) रखा गया था, जो फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (FOGSI) की एक महत्वपूर्ण परियोजना का हिस्सा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ. एलोरा दासगुप्ता ने अपने संबोधन में बताया कि इस प्रकार के अकादमिक सत्र स्त्री रोग विशेषज्ञों के बीच नवीन विचारों के आदान-प्रदान, एकजुटता और पेशेवर उत्कृष्टता को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होते हैं। इस सम्मेलन में हिसार के साथ-साथ फतेहाबाद और टोहाना क्षेत्र के 50 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अनुभव साझा किए।

प्रमुख विशेषज्ञों की उपस्थिति और संबोधन

कार्यक्रम में क्षेत्र के जाने-माने चिकित्सक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे, जिनमें सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. एलोरा दासगुप्ता, उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति जैन, सचिव डॉ. मीनू भाकर और आईएमए (IMA) अध्यक्ष डॉ. गुरनीश सिंह शामिल थे। सत्र के दौरान मुख्य वक्ताओं के रूप में सिविल अस्पताल मंडी के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक शर्मा, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद सिंगला और अंत:क्रिया विशेषज्ञ डॉ. सुरवित जैन ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने गर्भावस्था में आने वाली चुनौतियों और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने पर जोर दिया।