अपनी मांगों को लेकर होडल के सफाई कर्मचारी पिछले 11 दिनों से धरने पर हैं, जिससे पूरे शहर में कूड़े के अंबार लग गए हैं। कर्मचारियों की कमी और वेतन वृद्धि जैसी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है।

दीपक भारद्वाज,पलवल। होडल शहर में सफाई कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। इस हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और सड़कों पर कूड़े-कचरे के ढेर लग गए हैं। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने अपनी मांगों की अनदेखी किए जाने पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और रोष प्रकट किया। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी जायज मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता और उनकी यूनियन के नेताओं का आदेश नहीं आता, तब तक यह आंदोलन और काम बंद हड़ताल जारी रहेगी।

कर्मचारियों की कमी और सुरक्षा उपकरणों का अभाव

सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान महावीर सिंह और चुन्नी लाल ने बताया कि होडल नगर परिषद में कुल 40 सफाई कर्मचारी तैनात हैं, जबकि शहर की आबादी लगभग 2 लाख है। विडंबना यह है कि इन 40 में से 20 कर्मचारी सरकारी अधिकारियों के कार्यालयों में व्यक्तिगत कार्यों में लगे रहते हैं। ऐसे में मात्र 20 कर्मचारियों के भरोसे इतने बड़े शहर की सफाई करना असंभव है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों से नई भर्ती नहीं हुई है और उन्हें सफाई के लिए जरूरी सेफ्टी किट भी उपलब्ध नहीं कराई जाती। सीवरेज सफाई के दौरान होने वाली मौतों पर भी परिवारों को उचित आर्थिक सहायता नहीं मिली है और न ही लंबे समय से उनके वेतन में कोई बढ़ोतरी की गई है।

जनता और दुकानदारों में भारी रोष

शहर की बिगड़ती स्थिति पर स्थानीय दुकानदार नितिन बिंदल और प्रेम ने अपनी चिंता जाहिर की है। दुकानदारों का कहना है कि शहर के चारों तरफ गंदगी के ढेर लगे होने के कारण भयंकर दुर्गंध आ रही है, जिससे दुकानों पर बैठना तक दूभर हो गया है। गर्मी के मौसम में नियमित सफाई न होने से बीमारियां और महामारी फैलने की आशंका बढ़ गई है, जिससे आम जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद कार्यालय के भीतर बैठे अधिकारी इस गंभीर समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

हड़ताल का समाधान और आगामी स्थिति

फिलहाल, सफाई कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ठेके पर भर्ती के बजाय नियमित भर्ती और अपनी अन्य वित्तीय मांगों को लेकर झुकने वाले नहीं हैं। शहर की जनता अब प्रशासन से हस्तक्षेप की उम्मीद कर रही है ताकि जल्द से जल्द सफाई व्यवस्था बहाल हो सके। यदि जल्द ही प्रशासन और कर्मचारियों के बीच कोई समझौता नहीं होता, तो शहर में स्वच्छता की स्थिति और भी भयावह हो सकती है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अधिकारी कार्यालयों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखें और इस गतिरोध को खत्म कर जनता को गंदगी से निजात दिलाएं।