सोनू वर्मा, नूंह। जिले में बिना मान्यता के चल रहे निजी अस्पताल और क्लीनिक लोगों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे ये अस्पताल वर्षों से संचालित हो रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति दिखाई देती है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहर तक कई ऐसे निजी अस्पताल हैं, जिनके पास न तो मान्यता है और न ही जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं, फिर भी मरीजों का इलाज धड़ल्ले से किया जा रहा है।
कई अस्पतालों में इलाज के दौरान लापरवाही
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई अस्पतालों में इलाज के दौरान लापरवाही के चलते मरीजों की जान तक जा चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे बैठा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन अस्पतालों की जांच होती और नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाता, तो कई परिवार अपनों को खोने से बच सकते थे।
सूत्रों के अनुसार जिले में दर्जनों से जायदा निजी अस्पताल संचालित हैं, जिनके पास प्रशिक्षित डॉक्टर, जरूरी उपकरण और आपातकालीन सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
मरीजों से मोटी फीस वसूली
बावजूद इसके मरीजों से मोटी फीस वसूली जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना मान्यता वाले अस्पतालों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त
लोगों का कहना है कि यदि विभाग समय-समय पर निरीक्षण करे और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए, तो जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सुधर सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब जागता है और लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों पर क्या कार्रवाई होती है। इस मामले में एसएमओ नूंह डॉ कपिल देव ने कहा कि ऐसे अस्पताल जो बिना मान्यता के चल रहे उन सभी चिन्हित कर लिया है जल्दी ऐसे अस्पतालों में विभागीय कारवाही शुरू की जाएगी।।

