Business Desk – Housing Projects Scam : नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में घर खरीदारों के हजारों करोड़ रुपये के कथित दुरुपयोग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. आरोप है कि बिल्डर्स ने होमबायर्स से लिए गए पैसों को निर्माण कार्य में लगाने के बजाय दूसरी कंपनियों और प्रोजेक्ट्स में ट्रांसफर कर दिया है. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, प्रवर्तन निदेशालय (ED), RBI और कई रियल एस्टेट कंपनियों से जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए नोटिस
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने बुधवार को सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को नोटिस जारी किए. वहीं अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई तय की है.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, ED, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), यूपी RERA, नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) से जवाब मांगा है.
याचिकाकर्ता वंदना सभरवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा कि यह मामला सिर्फ एक प्रोजेक्ट का नहीं, बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में चल रहे कथित फंड डायवर्जन का उदाहरण है.
याचिका के अनुसार, बिल्डर्स घर खरीदारों से पैसे लेकर उन्हें निर्माण में खर्च करने के बजाय अपनी दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर देते हैं. बाद में प्रोजेक्ट्स दिवालिया प्रक्रिया में चले जाते हैं और खरीदारों को न घर मिलता है और न ही पैसा वापस.
ED जांच में क्या सामने आया?
ED की जांच के मुताबिक, जयप्रकाश एसोसिएट्स और जयप्रकाश इंफ्राटेक ने 25 हजार से ज्यादा घर खरीदारों से करीब 14,559 करोड़ रुपये जुटाए थे. आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल निर्माण कार्य के बजाय दूसरी संबंधित कंपनियों में किया गया. ED ने अब तक लगभग 400 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं, जबकि कथित हेराफेरी 14 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बताई जा रही है.
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण प्रशांत भूषण ने कहा कि यह समस्या बार-बार सामने आ रही है. बिल्डर्स पहले खरीदारों से पैसा लेते हैं, फिर उसे दूसरी जगह भेज देते हैं और आखिर में कंपनियां दिवालिया हो जाती हैं.
ऐसे में होमबायर्स सबसे ज्यादा नुकसान उठाते हैं. साथ ही उन्होंने अदालत से ED को जांच तेज करने और जहां भी पैसे या संपत्तियां ट्रांसफर की गई हों, वहां तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की.
प्रशांत भूषण ने RBI से भी हस्तक्षेप की मांग की. उनका कहना था कि रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के कारण बैंकों को भी भारी नुकसान हो रहा है. उन्होंने RBI से ऐसे मामलों की जांच और बैंकों के ऑडिट कराने की मांग की है.
घर खरीदारों की बढ़ी मुश्किलें
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि कई खरीदार सालों से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं. अगर वह रिफंड मांगते हैं तो उन्हें केवल वही रकम लौटाने की बात कही जाती है जो उन्होंने कई साल पहले जमा की थी, वह भी बिना ब्याज के. प्रशांत भूषण ने कहा कि आज उसी फ्लैट की कीमत तीन गुना तक बढ़ चुकी है, ऐसे में पुरानी रकम वापस मिलना खरीदारों के लिए बड़ा नुकसान है.

