राज्यसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केवल सजा और जुर्माना बढ़ाने से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान नहीं होगा। खड़गे ने दावा किया कि कांग्रेस ने वर्ष 2024 में ही मजबूत कानून लाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उस पर ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में दावा किया कि पीएम मोदी के 12 साल के कार्यकाल में सवा लाख छात्रों ने सुसाइड किया है। खड़गे ने कहा- 12 साल में पहली बार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ।
‘NTA की व्यवस्था नहीं बदली तो फिर होगा पेपर लीक’
खड़गे ने कहा कि यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में भी पेपर लीक की घटनाएं दोहराई जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल मंत्री बदलने तक खुद को सीमित रखा, जबकि परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार नहीं किए गए। उनके अनुसार, पेपर लीक सरकार की प्रशासनिक विफलता का उदाहरण है और सक्रिय गिरोह लंबे समय से काम कर रहे थे।
‘बिल अधूरा है, रोकथाम की स्पष्ट योजना नहीं’
विपक्ष के नेता ने कहा कि संशोधन विधेयक में पेपर लीक रोकने की ठोस रणनीति का अभाव है। उनके मुताबिक, बिल में आंकड़े और दंड के प्रावधान तो हैं, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई प्रभावी रोडमैप नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार यह विधेयक छात्रों के बढ़ते विरोध और दबाव के बाद लेकर आई है।
छात्रों पर बल प्रयोग को लेकर अमित शाह पर सवाल
20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस और पेलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाते हुए खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि इन कार्रवाइयों का आदेश किसने दिया और कहा कि यदि गृह मंत्री जवाब नहीं दे सकते तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर हुई कार्रवाई शर्मनाक थी और इसके लिए सरकार जिम्मेदार है।
वार्षिक परीक्षा कैलेंडर की मांग, धर्मेंद्र प्रधान पर तंज
खड़गे ने छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर (Annual Calendar) जारी करने की मांग की, ताकि भर्ती और परीक्षाओं में अनिश्चितता समाप्त हो। साथ ही उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुए स्वागत पर तंज कसते हुए कहा कि उनका स्वागत ऐसे किया गया, मानो वे कोई बड़ा युद्ध जीतकर लौटे हों।
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