देश की पहली महिला IPS अधिकारी और पुडुचेरी (Puducherry) की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी (Kiran Bedi) ने जंतर-मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शनों को लेकर बड़ा सुझाव दिया है। उनका मानना है कि जंतर-मंतर (Jantar Mantar) को अब स्थायी प्रदर्शन स्थल के रूप में नहीं रखा जाना चाहिए। किरण बेदी ने कहा कि जंतर-मंतर संसद भवन (Parliament House) के बेहद करीब स्थित है, जिससे बड़े आंदोलनों और प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा और यातायात संबंधी चुनौतियां पैदा होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आसपास के बाजारों और आम लोगों की गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ता है।
किरण बेदी ने सुझाव दिया कि धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों के लिए Ramlila Maidan को निर्धारित स्थल बनाया जा सकता है। उनके अनुसार, रामलीला मैदान बड़ा क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के बावजूद सुरक्षा और यातायात प्रबंधन अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से किया जा सकता है। किरण बेदी ने 20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में हुए आंदोलन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प तथा पैलेट गन (Pellet gun) इस्तेमाल किए जाने की स्थिति को सिस्टम की विफलता बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियां बनने से पहले संवाद, समन्वय और बेहतर भीड़ प्रबंधन के जरिए हालात को नियंत्रित किया जाना चाहिए था।
छात्र आंदोलनों से निपटने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के सामने सीधे सशस्त्र बलों को तैनात करना व्यवस्था की एक बड़ी खामी है। किरण बेदी ने कहा, “समस्या यहां आती है कि छात्र आंदोलन सीधे तौर पर सशस्त्र बलों के साथ टकराव में क्यों आया? यह हमारे सिस्टम की कमी है। हमारे यहां अब भी औपनिवेशिक ब्रिटिश व्यवस्था की सोच मौजूद है, जिसे बदलने की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों से निपटने की पहली जिम्मेदारी सिविल पुलिस की होनी चाहिए। “छात्र आंदोलन का पहला लाइन ऑफ डिफेंस सिविल पुलिस है। सवाल यह है कि हमने सिविल पुलिस का इस्तेमाल क्यों नहीं किया?”
तीसरी पंक्ति में हों सशस्त्र बल, हालात के अनुसार करें कार्रवाई’
20 जुलाई के ‘संसद चलो मार्च’ और उससे जुड़े घटनाक्रम पर किरण बेदी ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के सामने सबसे पहले सिविल डिफेंस और गैर-हथियारबंद कर्मियों को तैनात किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी जमावड़े को गैर-कानूनी घोषित किया जाता है, तो सबसे पहले संवाद और समझाइश के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स तोड़ने का प्रयास करें, तो दूसरी पंक्ति में महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया जा सकता है। उनके पास लाठियां न हों, लेकिन सुरक्षा के लिए आवश्यक हेड गियर और सुरक्षात्मक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। सशस्त्र बलों को अंतिम विकल्प के रूप में तैनात किया जाना चाहिए और उन्हें परिस्थिति के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वॉटर कैनन जैसी भीड़ नियंत्रण तकनीकों का इस्तेमाल भी अंतिम चरण में किया जाना चाहिए।
जंतर-मंतर की जगह रामलीला मैदान को प्रदर्शन स्थल बनाने की सलाह
किरण बेदी ने जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन के स्थायी स्थल के रूप में जारी रखने पर सवाल उठाते हुए इसे रामलीला मैदान में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है। जंतर-मंतर संसद भवन के बेहद करीब स्थित है, जिससे बड़े प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा, “हम सीधे प्रदर्शनकारियों को संसद भवन के दरवाजे दिखाते हैं। गंतव्य ही संसद भवन बना देते हैं, ऐसा क्यों?” धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों के लिए रामलीला मैदान अधिक उपयुक्त स्थान हो सकता है। जंतर-मंतर का क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटा है और उसके आसपास व्यावसायिक गतिविधियां होती हैं, जिससे प्रदर्शन के दौरान स्थानीय व्यापार और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बड़े आंदोलनों के दौरान बाजारों पर असर पड़ता है और कई बार दुकानों को समय से पहले बंद करना पड़ता है। बेदी के मुताबिक, यदि प्रदर्शनों को रामलीला मैदान जैसे बड़े और निर्धारित स्थल पर आयोजित किया जाए, तो सुरक्षा प्रबंधन बेहतर होगा और आसपास के कारोबार पर भी कम प्रभाव पड़ेगा।
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