भोपाल। हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मामले में गिरफ्तार पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को भोपाल सेंट्रल जेल की जिन सलाखों के पीछे भेजा गया है, वहां उनके लिए पल-पल भारी होने वाला है। खबर सिर्फ यह नहीं है कि मां-बेटे जेल में हैं, बल्कि सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसी भोपाल सेंट्रल जेल में 29 ऐसे कैदी बंद हैं, जिन्हें कभी खुद गिरिबाला सिंह ने जज रहते हुए सजा सुनाई थी। अब सवाल यह उठता है कि जिस जेल में खुद के फैसले से सजा पाए अपराधी मौजूद हों, वहां एक पूर्व जज और उनके बेटे का क्या होगा?
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‘शिकारी खुद यहां शिकार हो गया’ – सुरक्षा का सबसे बड़ा संकट
जेल प्रशासन के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की जान की सुरक्षा करना है। कानूनन जब कोई पूर्व जज या न्यायिक अधिकारी खुद आरोपी बनकर जेल जाता है तो उस पर हमले या बदले की भावना से कार्रवाई होने का खतरा सौ गुना बढ़ जाता है। जिन 29 कैदियों को गिरिबाला सिंह ने जेल भेजा था, उनके मन में कहीं न कहीं उनके प्रति गुस्सा या रंजिश हो सकती है। यही वजह है कि जेल के अंदर यह समीकरण बेहद संवेदनशील हो गया है।
जेल प्रशासन का ‘मेगा सिक्योरिटी प्लान’
इस खतरे को भांपते हुए भोपाल सेंट्रल जेल प्रशासन ने मां-बेटे के लिए सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जो आमतौर पर बेहद खूंखार या हाई-प्रोफाइल आतंकियों के लिए होता है।
24 घंटे सीसीटीवी की नजर
दोनों के बैरकों के बाहर अतिरिक्त नाइट-विज़न सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं, जिसकी मॉनिटरिंग सीधे जेल मुख्यालय से हो रही है।
12 प्रहरियों का कड़ा पहरा
समर्थ सिंह को सामान्य वार्ड में शिफ्ट तो किया गया है, लेकिन 5 जेल प्रहरी सिर्फ उसी की हर हरकत और उसके आसपास आने-जाने वालों पर विशेष नजर रख रहे हैं। वहीं, गिरिबाला सिंह के लिए 7 महिला प्रहरियों की राउंड द क्लॉक ड्यूटी लगाई गई है।
कैदियों से दूरी
यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इन दोनों का सामना उन 29 कैदियों से किसी भी कीमत पर न हो (चाहे वह खाने का समय हो या जेल का अहाता)।
जेल के अंदर एक और ‘जेल’
तकनीकी रूप से देखें तो गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को जेल के भीतर भी एक तरह से एकांतवास में रहना पड़ रहा है। सुरक्षा कारणों से उन्हें अन्य कैदियों की तरह खुलकर जेल परिसर में घूमने की आजादी नहीं मिल पाएगी। एक पूर्व जज के लिए, जो कभी अदालत में बैठकर फैसले सुनाती थीं, खुद को उसी जेल में बेहद कड़े पहरे और डर के साये में पाना एक बड़ा मनोवैज्ञानिक दबाव पैदा कर रहा है।
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आगे क्या होगा? क्या शिफ्ट होगी जेल?
कानूनी जानकारों की मानें तो यदि भोपाल सेंट्रल जेल में सुरक्षा को लेकर थोड़ा भी इनपुट या खतरा बढ़ता है, तो जेल प्रशासन गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को मध्य प्रदेश की किसी दूसरी सेंट्रल जेल में शिफ्ट करने की सिफारिश कोर्ट से कर सकता है। जब तक वे भोपाल जेल में हैं, तब तक वे जेल प्रशासन के लिए ‘हाई-रिस्क’ कैदी बने रहेंगे।

