आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। जिले में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। युक्तियुक्तकरण के बाद भी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो सकी है। हालात यह हैं कि जिले के 307 प्राथमिक विद्यालय आज भी सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं। पहले एकल शिक्षकीय स्कूलों की संख्या 292 थी, लेकिन अब यह बढ़कर 307 हो गई है।
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अधिकारियों के मुताबिक, कई प्रधान अध्यापकों की मृत्यु, कुछ शिक्षकों के दूसरी नौकरी में चयन और त्यागपत्र देने के कारण यह स्थिति और गंभीर हो गई है। एक ही शिक्षक को पढ़ाई के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य, मिड-डे मील, रिकॉर्ड संधारण और अन्य सरकारी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ रही हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी?

युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों का संतुलित वितरण था, लेकिन जमीनी तस्वीर बताती है कि कई स्कूल अब भी पर्याप्त शिक्षकों का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि जब तक नई शिक्षक भर्ती पूरी नहीं होती और उनकी पदस्थापना नहीं होती, तब तक एकल शिक्षकीय विद्यालयों की संख्या में कमी आना संभव नहीं है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बच्चों का भविष्य लंबे समय तक सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे छोड़ दिया जाएगा, या फिर सरकार जल्द भर्ती कर इन स्कूलों को पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराएगी?
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