अजयारविंद नामदेव, शहडोल। सोशल मीडिया पर लाखो फॉलोअर्स वाले ट्रैफिक हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी विवादों में हैं। हेड कांस्टेबल को पुलिस अधीक्षक ने ड्यूटी से लंबे समय तक गैरहाजिर रहने और सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया है। कार्रवाई के बाद विवेकानंद तिवारी ने फेसबुक पर मेडिकल दस्तावेज साझा करते हुए दावा किया है कि वे मानसिक तनाव और बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने विभाग को पहले ही सूचना दे दी थी।

सोशल मीडिया पर वीडियो और रील्स अपलोड करते रहे

दरअसल विवेकानंद तिवारी पिछले करीब 15 दिनों से ड्यूटी से अनुपस्थित थे। इसी दौरान वे सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो और रील्स अपलोड करते रहे। विभागीय जांच में यह बात सामने आई कि वे शासकीय कार्य से दूरी बनाकर निजी प्रचार और सोशल मीडिया गतिविधियों में सक्रिय थे, जो पुलिस रेग्यूलेशन 64 के तहत सेवा की सामान्य शर्तों का उल्लंघन है। वायरल वीडियो में वे कई बार पुलिस वर्दी में दिखाई दिए, जबकि कुछ वीडियो में वर्दी के मोनो को हटाकर अलग प्रस्तुति दी गई, जिसे विभागीय अनुशासन के विपरीत माना गया।

मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टर और दवाइयों की पर्ची अपलोड

निलंबन के बाद विवेकानंद तिवारी ने अपनी ऑफिशियल फेसबुक आईडी पर लंबा पोस्ट शेयर कर सफाई दी। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टर की पर्ची और दवाइयों के दस्तावेज भी अपलोड किए। उन्होंने लिखा कि पिछले तीन महीनों से वे मानसिक तनाव, घबराहट, बेचैनी, नींद न आने और सड़क दुर्घटनाओं की घटनाओं से मानसिक रूप से परेशान थे।

19 मई 2026 को उन्होंने मोबाइल फोन के माध्यम से यातायात थाना को सूचना दी थी कि उनकी तबीयत खराब है और वे मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने जा रहे हैं। वहां उन्होंने साइकैट्रिस्ट से इलाज कराया और डॉक्टर ने उन्हें एक सप्ताह आराम की सलाह दी।

मजबूरी में मुझे सारे दस्तावेज सार्वजनिक करने पड़े

उन्होंने दावा किया कि मेडिकल पर्ची थाना के व्हाट्सएप ग्रुप में भेजी गई थी, जिसमें पुलिस अधीक्षक भी जुड़े हुए थे, इसके बावजूद उसी दिन दोपहर 2 बजे उनकी ड्यूटी जय स्तंभ चौक पर लगा दी गई और शाम करीब 5 बजे उन्हें ड्यूटी से गैरहाजिर दर्ज कर लिया गया। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में उल्लेखित किया कि मैं बिना सूचना के गैरहाजिर नहीं हूं, विभाग की गरिमा का सम्मान करता हूं, लेकिन मजबूरी में मुझे सारे दस्तावेज सार्वजनिक करने पड़े। अब मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ विभाग अनुशासनहीनता की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर प्रधान आरक्षक खुद को मानसिक रूप से बीमार बताते हुए मेडिकल आधार पर अपनी गैरमौजूदगी को जायज ठहरा रहे हैं।

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