हेमंत शर्मा, इंदौर। आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए चल रहे भूमि अधिग्रहण के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है। कलेक्ट्रेट में एक पीड़ित महिला ने सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने पहुंचकर गुहार लगाई और मेट्रो प्रोजेक्ट के अधिकारियों पर मुआवजे के वितरण में गंभीर भेदभाव और लैंगिक असमानता (Gender Discrimination) बरतने के आरोप लगाए हैं। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला को उचित जांच और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
क्या है पूरा मामला?
इंदौर के बड़ा गणपति क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए प्रशासन द्वारा कुल 10 मकानों का अधिग्रहण किया जाना था। इनमें से 9 मकान मालिकों के मामलों का निपटारा आपसी सहमति और तय प्रक्रिया के तहत हो चुका है। लेकिन एकमात्र शेष बचे मकान की महिला मालिक ने मुआवजे की राशि को लेकर मोर्चा खोल दिया है और सीधे मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
मुआवजा प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप
महिला का आरोप है कि मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत उसके मकान के बदले प्रशासन द्वारा महज 16 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है। जबकि इसी क्षेत्र में अन्य मकान मालिकों को उनके मकानों के बदले 40 लाख रुपये तक की राशि का भुगतान किया गया है। महिला ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली और मानसिकता पर सवाल उठाते हुए एक बड़ा खुलासा किया। महिला के मुताबिक, जब उसने इस विसंगति को लेकर अधिकारियों से बात की, तो अधिकारियों ने बेहद शर्मनाक दलील देते हुए कहा कि- “अगर तुम्हारा बेटा होता, तो ज्यादा पैसा मिलता।”
“बेटियों की वजह से कम मिलेगा हक?”
अधिकारियों की इस टिप्पणी से आहत महिला ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी व्यथा रखते हुए सवाल उठाया— “मेरी तीन बेटियां हैं, मैं बेटा कहां से लाऊं? क्या सिर्फ बेटियों की वजह से मुझे मेरा पूरा हक नहीं मिलेगा?” महिला के इस सवाल ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है और मेट्रो प्रोजेक्ट की मुआवजा वितरण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने दिलाया भरोसा
इस संवेदनशील शिकायत को सुनने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला को ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय या भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने तत्काल मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश देते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और महिला को हरसंभव वैधानिक मदद और उचित हक दिलाया जाएगा।

