कुंदन कुमार/पटना। राजधानी स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में हाल ही में इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ सर्जन्स (ICS) की एकेडमिक मीटिंग और फेलोशिप कन्वोकेशन का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के क्षेत्र में हो रहे वैश्विक बदलावों और अत्याधुनिक तकनीकों से बिहार के सर्जनों को रूबरू कराना था।
विश्व स्तरीय तकनीक से बिहार को जोड़ना प्राथमिकता
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए प्रख्यात सर्जन डॉ. अहमद अब्दुल हई ने संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि ICS एक वैश्विक मंच है जो दुनिया भर में सर्जरी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध और नवाचारों को भारतीय चिकित्सा प्रणाली में समाहित करने का निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन से बिहार के सर्जनों को विश्व स्तरीय तकनीकें सीखने का अवसर मिलेगा जिसका सीधा लाभ राज्य की आम जनता को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाओं के रूप में मिलेगा।
IGIMS में रोबोटिक सर्जरी का विशेष सत्र
कार्यक्रम के दौरान आईजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि ICS की भारतीय शाखा के अंतर्गत इस विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा हमारा मुख्य ध्येय सर्जिकल क्षेत्र में आए नए बदलावों की विस्तृत जानकारी अपने डॉक्टरों तक पहुंचाना है।
डॉ. मंडल ने विशेष रूप से रोबोटिक सर्जरी पर चर्चा करते हुए बताया कि आईजीआईएमएस में अब अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी मशीनें उपलब्ध हैं। इस बैठक के दौरान रोबोटिक सर्जरी की कार्यप्रणाली, वैश्विक स्तर पर इसकी स्थिति, इसकी खूबियों और सीमाओं पर विशेषज्ञों ने विस्तृत व्याख्यान दिए।
चिकित्सा शिक्षा और जनहित का संगम
इस संगोष्ठी का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि इसमें केवल सैद्धांतिक चर्चा ही नहीं बल्कि व्यावहारिक पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। डॉक्टरों का मानना है कि जब तक सर्जन नई तकनीक की बारीकियों को बेहतर ढंग से नहीं समझेंगे तब तक बिहार की जनता को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। इस कन्वोकेशन में फेलोशिप प्राप्त करने वाले सर्जनों के लिए भी यह एक नई शुरुआत रही जिससे बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में सुधार आने की उम्मीद है।
यह आयोजन स्पष्ट करता है कि आईजीआईएमएस न केवल मरीजों के उपचार के लिए बल्कि चिकित्सा शिक्षा और नवाचार के केंद्र के रूप में भी तेजी से विकसित हो रहा है, जिससे भविष्य में सर्जरी के जटिल मामलों का इलाज अब बिहार में ही संभव हो सकेगा।

