अनूप दुबे, कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के ढीमरखेड़ा तहसील से अवैध रेत उत्खनन का मामला सामने आया है। यहां के दसरमन गांव में स्थित सुप्रसिद्ध महादेवी माता मंदिर के पास बहने वाली दतला नदी से दिनदहाड़े धड़ल्ले से रेत निकाली जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे अवैध कारोबार को स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का मूक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते रेत माफिया बिना किसी डर के नदी का सीना छलनी कर रहे हैं।

लंबे समय से चल रहा उत्खनन

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, दसरमन गांव के महादेवी मंदिर के पास दतला नदी से लंबे समय से बिना किसी वैध स्वीकृति या रॉयल्टी के अवैध रेत खदान का संचालन किया जा रहा है। नदी के बीचों-बीच जेसीबी और डंपर उतारकर गहरे गड्ढे किए जा रहे हैं। जिससे यहां कभी भी कोई बड़ी अनहोनी घट सकती है। लगातार हो रहे अंधाधुंध उत्खनन के कारण पवित्र दतला नदी अब सूखकर पूरी तरह मैदान में तब्दील हो चुकी है, जिसका पूरा फायदा रेत माफिया उठा रहे हैं।

सिलौंडी पुलिस पर ‘खानापूर्ति’ करने के गंभीर आरोप

यह पूरा मामला सिलौंडी पुलिस चौकी क्षेत्र के अंतर्गत आता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी अवैध उत्खनन को लेकर पुलिस से शिकायत की जाती है तो सिलौंडी पुलिस सिर्फ दिखावे और खानापूर्ति के लिए नाममात्र की कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा कर देती है। पुलिस की इसी सुस्ती और कथित साठगांठ के हौसले पाकर रेत माफिया दिन के उजाले में बेखौफ होकर अवैध परिवहन को अंजाम दे रहे हैं।

ग्रामीणों ने कलेक्टर और एसपी से लगाई न्याय की गुहार

नदी के अस्तित्व और पर्यावरण को हो रहे भारी नुकसान से परेशान होकर अब दसरमन गांव के ग्रामीणों ने सीधे जिले के आला अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। ग्रामीणों ने कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी और एसपी अभिनव विश्वकर्मा से इस पूरे अवैध कारोबार की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी रेत माफियाओं सहित उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

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