असम के धेमाजी जिले के एक बड़े अफसर DDO को भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है. असम राज्य सिविल सर्विस के इस जिला विकास अधिकारी करोड़ों रुपए की ठगी के आरोप लगे हैं. आरोप है कि उसने लोगों को झांसा देने के लिए एक मिमिक्री करने वाले शख्स की मदद ली, जो फोन पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और असम के मुख्य सचिव रवि कोटा जैसे बड़े अफसरों की आवाज में बात करता था.
शिकायत है कि उसने सरकारी ठेका, नौकरी और शराब की दुकान का लाइसेंस दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपए ठगे. उन पर सरकारी पद का गलत इस्तेमाल करने और अपनी आमदनी से कहीं ज्यादा संपत्ति जमा करने का आरोप है.
असम में गिरफ्तार सिविल सेवा अधिकारी देबेश्वर बोरा पर लगे आरोपों ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा तक के होश उड़ा कर रख दिया है. गिरफ्तार अधिकारी देबेश्वर बोरा 1999 बैच के असम सिविल सर्विस अफसर हैं. अभी वह वर्तमान में धेमाजी जिले के डेवलपमेंट कमिश्नर हैं.
आरोप है कि नौकरी और सरकारी ठेके दिलाने के लिए लोगों को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और वरिष्ठ अधिकारियों जैसी आवाज में फोन कॉल कराए जाते थे. कोई भी फोन कॉल पर शक ना करे, इसके लिए देबेश्वर बोरा ने एक मिमिक्री आर्टिस्ट का इस्तेमाल किया. जिससे कि लोगों को अधिकारी की सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच पर भरोसा हो सके.
आरोप है कि नौकरी या ठेका चाहने वाले लोगों को फोन पर ऐसे शख्स से बात कराई जाती थी, जो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, मुख्य सचिव रवि कोटा या दूसरे वरिष्ठ अफसरों की आवाज में बातचीत करता था.
यह पूरा मामला एक डॉक्टर की शिकायत के बाद शुरू हुआ, जब बोरा मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट में जॉइंट सेक्रेटरी थे. नवंबर 2020 में एक 32 साल की महिला ने देबेश्वर बोरा पर बलात्कार की कोशिश और अभद्र भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी.
विजिलेंस के अनुसार, बोरा ने एक व्यक्ति से ₹2 करोड़ और दूसरे से ₹50 लाख लिए. उन पर राजनीतिक नेता रमेन बरठाकुर से भी ₹50 लाख रिश्वत मांगने का आरोप है.
जांच में सामने आया है कि बोरा अकेले यह काम नहीं कर रहा था। उसके साथ एक पूरी टीम जुड़ी थी. टीम के सदस्य लोगों से संपर्क करने और ठगी को अंजाम देने में मदद करते थे. जांच के दौरान बोरा के पास से 9 मोबाइल फोन बरामद किए गए। इनमें सिर्फ एक सिम कार्ड उनके नाम पर था.
विजिलेंस बोरा की आय से अधिक संपत्ति की भी जांच कर रही है. पुलिस और विजिलेंस की टीम अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कितने लोगों को इस तरीके से फंसाया गया. हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.
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