ईरान की राजधानी तेहरान में आयोजित पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भारत सरकार के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने ईरानी नेतृत्व से मुलाकात कर श्रद्धांजलि अर्पित की। ईरान ने खामेनेई के निधन के लगभग चार महीने बाद बड़े पैमाने पर अंतिम संस्कार समारोह आयोजित किया।
चाबहार पोर्ट पर भारत-ईरान के बीच अहम बातचीत
अंतिम संस्कार कार्यक्रम के इतर बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने ईरान के उप-गृह मंत्री अली अकबर पोरजमशिदियन से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक महत्व वाले चाबहार पोर्ट समेत द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि बैठक में क्या सहमति बनी, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
चाबहार पोर्ट क्यों है भारत के लिए रणनीतिक?
ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित चाबहार पोर्ट भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति का अहम केंद्र है। इस बंदरगाह के जरिए भारत अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक बिना पाकिस्तान के रास्ते पहुंचे व्यापारिक गलियारे को मजबूत करना चाहता है। साथ ही यह परियोजना क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के रणनीतिक प्रभाव का संतुलन बनाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या फिर रफ्तार पकड़ेगा चाबहार प्रोजेक्ट?
भारत ने चाबहार पोर्ट के विकास में बड़ा निवेश किया है, लेकिन हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव और ईरान में संघर्ष के कारण परियोजना की गतिविधियां सीमित हो गई थीं। अब हालात सामान्य होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और ईरान इस रणनीतिक परियोजना पर काम को दोबारा गति दे सकते हैं। तेहरान में हुई बैठक को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल भारतीय या ईरानी सरकार की ओर से बैठक के एजेंडे या संभावित समझौतों पर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। दोनों देशों की ओर से केवल इतना कहा गया है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अंतिम संस्कार में शामिल होकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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