कोटा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर राजस्थान के कोटा ज़िले में टाइगर रिजर्व के नीचे बनी भारत की पहली आठ-लेन हाईवे टनल इस साल अगस्त में आवाजाही के लिए आधिकारिक तौर पर खुल जाएगी। अभी हल्की गाड़ियों के साथ सुरक्षा ट्रायल चल रहे हैं।

एक्सप्रेसवे के दिल्ली-वड़ोदरा सेक्शन पर राजस्थान में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (MHTR) के नीचे बनी 4.9 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब टनल को सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद शुरुआती तौर पर कारों और इमरजेंसी गाड़ियों के लिए खोल दिया गया है।

भारी गाड़ियों और बाकी सभी तरह के ट्रैफिक को टनल के अंदर सुरक्षा सिस्टम और मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी से जुड़ी अतिरिक्त जांच पूरी होने के बाद ही अनुमति दी जाएगी।

कोटा में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने न्यूज एजेंसी को बताया, “MHTR (मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व) के नीचे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बनी आठ-लेन हाईवे सुरंग को अभी सभी तरह की गाड़ियों के लिए आधिकारिक तौर पर नहीं खोला गया है। अभी सिर्फ़ कारों जैसी हल्की गाड़ियों के साथ ट्रायल चल रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि सुरंग का सिविल काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन सुरंग के अंदर बाकी काम और रेगुलर टेस्टिंग साथ-साथ चल रही है।

अग्रवाल ने बताया कि केंद्रीय मंत्रालय के निर्देशों के बाद, अगस्त में सभी तरह की गाड़ियों के लिए सुरंग के आधिकारिक तौर पर खुलने की उम्मीद है।

NHAI अधिकारियों के अनुसार, यह सुरंग पूरी तरह से टाइगर रिज़र्व के नीचे बनाई गई है, ताकि वन्यजीवों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए और जंगल के इकोसिस्टम को बचाया जा सके।

इसका डिज़ाइन ऐसा है कि जानवर हाईवे के ट्रैफ़िक से बिना किसी रुकावट के सुरंग के ऊपर आज़ादी से घूम सकते हैं। यह ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ लाने का एक बेहतरीन उदाहरण है।

इस सुरंग में दो ट्यूब हैं, जिनमें से हर एक में ट्रैफ़िक के लिए चार लेन हैं। यह किसी वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी के नीचे भारत की पहली आठ-लेन सुरंग है। इसे बनाने में खास इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया ताकि पर्यावरण पर कम से कम असर पड़े और ट्रैफ़िक सुरक्षित और तेज़ी से चल सके।

इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में चार साल से ज़्यादा का समय लगा। इंजीनियरों ने कड़े संरक्षण मानकों का पालन करते हुए भूवैज्ञानिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना किया। रिज़र्व में वाइल्डलाइफ़ कॉरिडोर बनाए रखे गए हैं ताकि बाघों और दूसरे जानवरों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो सके।

उम्मीद है कि यह सुरंग दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-वडोदरा हिस्से पर यात्रा के समय को काफ़ी कम कर देगी, क्योंकि इससे रिज़र्व से होकर गुज़रने वाली लगभग 25 किलोमीटर लंबी घुमावदार सड़क की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

अधिकारियों का अनुमान है कि जब पूरा एक्सप्रेसवे पूरी तरह से चालू हो जाएगा, तो दिल्ली और वडोदरा के बीच यात्रा का कुल समय लगभग 20-22 घंटे से घटकर 10-12 घंटे हो सकता है।

NHAI के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रायल के साथ-साथ चरणों में इसे खोलने का काम तब तक जारी रहेगा जब तक कि कम्युनिकेशन सिस्टम और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम समेत सभी सुरक्षा सुविधाओं की पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो जाती। इसके बाद सुरंग को सभी तरह की गाड़ियों के लिए खोल दिया जाएगा, जिसकी संभावना इस साल अगस्त में 31 जुलाई के बाद किसी भी दिन है।

इस प्रोजेक्ट को तेज़ रफ़्तार ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और वन्यजीव संरक्षण को एक साथ लाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

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