हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जिस मां ने चार बेटों को जन्म दिया, उसी मां की मौत के बाद चारों बेटों ने अंतिम संस्कार से किनारा कर लिया। मौत के बाद तीन दिन तक बेटों का इंतजार किया गया, लेकिन न कोई बेटा आया और न ही किसी ने मुखाग्नि देने की जिम्मेदारी उठाई।
दरअसल, सिलिकॉन सिटी की गणेश रेसिडेंसी में रहने वाली लता बाई की 13 सितंबर को मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि लता बाई ने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी और जेवर बेचकर फ्लैट खरीदा था। आरोप है कि बाद में फ्लैट बेटों के नाम करवा लिया गया और मां को घर से बाहर कर दिया गया। सड़क पर भटकती लता बाई की जानकारी समाजसेवी संगठन प्रीयु फाउंडेशन के अजय नागदा को मिली।
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इसके बाद उन्हें जानकी वृद्धाश्रम में आश्रय दिलाया गया। करीब आठ महीने तक लता बाई वृद्धाश्रम में रहीं। तबीयत बिगड़ने पर एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत की सूचना चारों बेटों को दी गई, लेकिन परिजनों की तरफ से अंतिम संस्कार के लिए कोई नहीं पहुंचा। इसके बाद जानकी वृद्धाश्रम और प्रीयु फाउंडेशन के सदस्य आगे आए और उन्होंने बेटे का फर्ज निभाते हुए लता बाई का अंतिम संस्कार कराया। ये मामला सिर्फ एक मां की मौत का नहीं बल्कि उस रिश्ते पर बड़ा सवाल है, जिसे दुनिया का सबसे मजबूत रिश्ता माना जाता है।
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