हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर में इस मानसून अब तक 14.3 इंच बारिश हो चुकी है, लेकिन शहर के तालाब अभी भी आधे से ज्यादा खाली हैं। सामान्य से बेहतर बारिश के बावजूद जलाशयों का जलस्तर उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि लंबे समय तक हुई रिमझिम बारिश का अधिकांश पानी जमीन ने सोख लिया, जिससे तालाबों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच सका। अब शहर की नजरें अगस्त और सितंबर की तेज बारिश पर टिकी हैं। यदि अगले दो महीनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो आने वाले समय में जल संकट की आशंका बढ़ सकती है।
तालाब क्यों नहीं भर पाए?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार मई और जून में भी अच्छी बारिश हुई थी, जिससे जमीन में नमी पहले से मौजूद थी। इसके बाद जुलाई में अधिकांश समय रिमझिम बारिश होती रही। इस तरह की बारिश का पानी सीधे तालाबों में बहने के बजाय मिट्टी में समा गया। यही कारण है कि जलाशयों का जलस्तर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया।
पिछले साल से बेहतर, लेकिन औसत से अभी भी कम
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इंदौर में अब तक 14.3 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में बेहतर है, लेकिन शहर की औसत मानसूनी बारिश करीब 37 इंच मानी जाती है। यानी अभी भी सामान्य बारिश का बड़ा हिस्सा बाकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश होती है तो जलाशयों की स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है।
बदल रहा है मानसून का पैटर्न
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मानसून का स्वरूप तेजी से बदला है। पहले जुलाई में लगातार तेज बारिश होती थी, जिससे तालाब जल्दी भर जाते थे। अब मानसून का बड़ा हिस्सा अगस्त और सितंबर में सक्रिय हो रहा है। इसी वजह से जलाशयों के भरने का समय भी बदलता दिखाई दे रहा है।
जुलाई के मौसम का इतिहास
मौसम विभाग के पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि जुलाई में इंदौर में कई बार रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई है। वर्ष 1973 में जुलाई के महीने में 30 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जाता है। वहीं एक दिन में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड भी जुलाई के नाम दर्ज है। हालांकि इस बार जुलाई में बारिश का स्वरूप अलग रहा। तेज बारिश के बजाय अधिकांश समय हल्की और रुक-रुक कर वर्षा हुई।
अगले दो महीने होंगे निर्णायक
शहर की जलापूर्ति व्यवस्था काफी हद तक तालाबों और जलाशयों पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि अगस्त और सितंबर में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो इसका असर आने वाले महीनों में जल उपलब्धता पर पड़ सकता है। अब उम्मीद मानसून के अगले चरण से है। यदि मौसम मेहरबान रहा तो खाली पड़े तालाब भर सकते हैं और जल संकट की आशंका भी टल सकती है। लेकिन यदि बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो इंदौर को पानी के मोर्चे पर नई चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
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