हेमंत शर्मा, इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय का चैनल गेट तोड़े जाने के मामले में पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। वहीं बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिंह यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

राकेश सिंह यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि शिक्षा के मंदिर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को निम्नस्तरीय राजनीति का अखाड़ा बनाने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली अराजकता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।

“DAVV को राजनीतिक अखाड़ा बनाने की कोशिश”

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि NSUI से जुड़े प्रदर्शन के दौरान DAVV का गेट तोड़े जाने की घटना ने छात्र राजनीति की गरिमा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा छात्रों का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया गया।

राकेश सिंह यादव ने अपने ट्वीट में आरोप लगाया कि इस पूरे मामले के पीछे राऊ विधानसभा क्षेत्र के पराजित कांग्रेस प्रत्याशी की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी इस कथित साजिश का केंद्र बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की।

बिजलपुर से जुड़े होने का लगाया आरोप

बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम की कड़ियां बिजलपुर तक जाती नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि जांच के जरिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस मामले में किसी राजनीतिक साजिश की भूमिका है या नहीं।

CCTV फुटेज सुरक्षित करने की मांग

राकेश सिंह यादव ने DAVV प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि…

  • गेट तोड़ने वालों की पहचान के लिए CCTV फुटेज सुरक्षित की जाए।
  • विश्वविद्यालय की संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन किया जाए।
  • दोषियों और साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पढ़ाई, शोध और प्रतिभा का केंद्र है, राजनीतिक अराजकता का अखाड़ा नहीं। छात्र राजनीति स्वीकार्य है, लेकिन शिक्षा के मंदिर में हिंसा और तोड़फोड़ को किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। वहीं अब इस मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह मामला छात्र आंदोलन से आगे बढ़कर सियासी मुद्दा बन सकता है।

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