हेमंत शर्मा, इंदौर। स्मार्ट सिटी और बेहतर सड़कों के दावों के बीच इंदौर का एक और ओवरब्रिज सवालों के घेरे में आ गया है। करीब 35 करोड़ रुपए की लागत से बना राजेंद्र नगर ओवरब्रिज महज पांच साल में ही दरकने लगा है। ब्रिज के ऊपरी हिस्से पर बड़ी दरारें और उखड़ता डामर न केवल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहे हैं, बल्कि बारिश के मौसम में बड़े हादसे की आशंका भी बढ़ा रहे हैं।

ब्रिज की सतह पर कई जगह डामर उखड़ चुका है और बीच सड़क में लंबी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण इन दरारों में पानी भर रहा है, जिससे सड़क की ऊपरी परत के साथ-साथ नीचे मौजूद कंक्रीट स्ट्रक्चर और जॉइंट्स को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

यह ओवरब्रिज अन्नपूर्णा क्षेत्र में ट्रैफिक का प्रमुख मार्ग है। इसी रास्ते से हजारों वाहन रोजाना गुजरते हैं। ब्रिज अन्नपूर्णा रोड, एबी रोड और केट रोड को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति वाहन चालकों के लिए परेशानी और दुर्घटना का कारण बन सकती है।

जानकारी के मुताबिक, इस ओवरब्रिज का निर्माण पीडब्ल्यूडी ने कराया था। निर्माण पूरा होने के बाद इसका रखरखाव नगर निगम को सौंप दिया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत के दावे आखिर कागजों तक ही क्यों सीमित रह गए? यदि समय-समय पर मेंटेनेंस किया जाता, तो शायद आज ब्रिज की यह स्थिति नहीं होती।

इंजीनियरों के अनुसार, फ्लाईओवर या ओवरब्रिज की ऊपरी सतह पर जब दरारें पड़ती हैं तो बारिश का पानी सीधे नीचे के कंक्रीट स्ट्रक्चर और एक्सपेंशन जॉइंट्स तक पहुंच जाता है। इससे लोहे और कंक्रीट की मजबूती प्रभावित होती है और समय के साथ सड़क बड़े गड्ढों में तब्दील होने लगती है। यही वजह है कि ऐसे मामलों में तत्काल मरम्मत और दरारों की सीलिंग बेहद जरूरी मानी जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्रिज पर कई दिनों से सड़क खराब है, लेकिन अब तक केवल पैचवर्क की बातें होती रही हैं। बरसात में दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने का खतरा लगातार बना हुआ है। लोगों ने नगर निगम से जल्द स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 35 करोड़ रुपए की लागत से बना ओवरब्रिज आखिर पांच साल में ही क्यों दरकने लगा? क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कमी थी या फिर रखरखाव में लापरवाही बरती गई? फिलहाल बारिश के बीच यह ओवरब्रिज प्रशासन की कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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