हेमंत शर्मा, इंदौर। महिला दिवस के मौके पर हम आपको इंदौर की एक ऐसी महिला सब इंस्पेक्टर की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने नौकरी नहीं बल्कि एक संकल्प चुना। महिलाओं की मदद करने के इरादे से पुलिस की वर्दी पहनने वाली सब इंस्पेक्टर श्रद्धा सिंह पवार आज हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद का नाम बन चुकी हैं।
6 सालों में 9000 से ज्यादा आवेदनों का निराकरण
साल 2016 में पुलिस विभाग जॉइन करने वाली श्रद्धा पवार ने पिछले 6 सालों में 9000 से ज्यादा आवेदनों का निराकरण किया है। इनमें घरेलू हिंसा, पति-पत्नी के विवाद, महिला उत्पीड़न, परिवारिक झगड़े और सोशल मीडिया से जुड़े मामलों की बड़ी संख्या शामिल है। खास बात यह है कि श्रद्धा ने सिर्फ केस निपटाए ही नहीं, बल्कि कई टूटते परिवारों को जोड़ने का काम भी किया। उनके प्रयास से सैकड़ों पति-पत्नी फिर से एक साथ रहने लगे।
बैंक, LIC छोड़कर चुनी पुलिस की वर्दी
श्रद्धा पवार की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने पुलिस की नौकरी मजबूरी में नहीं, बल्कि चुनकर की। उन्होंने साल 2014 में एक साथ चार अलग-अलग सेक्टर की परीक्षाएं दी थीं। दो बैंक, एक LIC और एक पुलिस विभाग। चारों जगह उनका चयन हो गया था, लेकिन उन्होंने आरामदायक नौकरी छोड़कर पुलिस की वर्दी पहनने का फैसला लिया।
युवतियों को खास संदेश
श्रद्धा पवार बताती हैं कि अगर उन्हें आसान नौकरी करनी होती तो वे बैंक या LIC में जा सकती थीं, लेकिन उनका मन महिलाओं के लिए काम करने में था। यही वजह रही कि उन्होंने वर्दी पहनी और उसी दिन तय कर लिया कि जितना हो सके उतनी महिलाओं की मदद करेंगी। महिला दिवस पर श्रद्धा पवार ने युवतियों को खास संदेश भी दिया। उनका कहना है कि आज के समय में लड़कियों को सबसे पहले अपने करियर पर ध्यान देना चाहिए, आत्मनिर्भर बनना चाहिए और उसके बाद ही सोशल मीडिया की दुनिया में कदम रखना चाहिए।
बिना पहचान मुलाकात बन सकती है मुसीबत
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति से सोशल मीडिया पर जुड़ना, अपनी प्रोफाइल या बैंकिंग डिटेल शेयर करना और बिना जानकारी के किसी से मिलना कई बार बड़ी परेशानी की वजह बन जाता है। कई मामलों में छोटी-सी लापरवाही ही अपराध की शुरुआत होती है।
मजबूत महिला की बताई पहचान
श्रद्धा पवार का मानना है कि मजबूत महिला वही है जो खुद के पैरों पर खड़ी हो और जरूरत पड़ने पर दूसरों को भी संभाल सके। इंदौर की यह महिला सब इंस्पेक्टर आज सिर्फ पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि हजारों महिलाओं के लिए भरोसे का नाम बन चुकी हैं।

