हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के शीतल नगर बाणगंगा की रहने वाली निशा चावड़ा ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिस पर पूरे मध्यप्रदेश को नाज़ है। हाल ही में अहमदाबाद के ट्रांस स्टेडियम में 4 से 8 जून 2026 के बीच आयोजित हुई पहली विश्व योगासन स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में निशा ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया और भारत का तिरंगा ऊंचा किया।
एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली निशा के पिता ओमप्रकाश चावड़ा एक मेहनतकश इंसान हैं और घर में सिलाई का काम होता है लेकिन इसी साधारण से आँगन में एक असाधारण बेटी पली-बढ़ी। महज 8 साल की उम्र से योगासनों का अभ्यास शुरू करने वाली निशा को आज इस साधना के 22 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
यह उनकी पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है। इससे पहले 25 से 27 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में हुई। दूसरी एशियन योगासन स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में भी निशा ने गोल्ड मेडल जीतकर एशिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इतना ही नहीं, निशा 5 बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी कॉम्पटीशन में भी हिस्सा ले चुकी हैं और कई राष्ट्रीय पुरस्कार अपनी झोली में समेट चुकी हैं।
खिलाड़ी होने के साथ-साथ निशा एक समर्पित योग प्रशिक्षक भी हैं। वर्ष 2009 से वे योग सिखाने का कार्य कर रही हैं और इस क्षेत्र में उन्हें 16 से 17 वर्षों का अनुभव है। फिलहाल निशा बालाजी सेवार्थ विनोद अग्रवाल फाउंडेशन के अंतर्गत संचालित चमेली देवी योग केंद्र से जुड़ी हुई हैं, जहां वे शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। वे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से योग प्रशिक्षण देती हैं, ताकि हर वर्ग तक योग की पहुँच हो सके। निशा चावड़ा की यह यात्रा सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं है, यह उस हर बेटी की प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद असीमित सपने देखती है।

