Business Desk – Inflation Rises in India 2026 : आम आदमी की रसोई पर महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 5 महीनों में खाने-पीने की लगभग हर जरूरी चीज महंगी हुई है। 28 फरवरी से 3 अगस्त के बीच, यानी करीब पांच महीने में 16 प्रमुख खाद्य वस्तुओं में से 15 के दाम बढ़े हैं।

सबसे ज्यादा महंगाई दालों और खाद्य तेलों में देखने को मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

5 महीने में राशन की लगभग हर जरूरी चीज महंगी

उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच महीनों में राशन की 16 प्रमुख वस्तुओं में से 15 के दाम बढ़े हैं। इस दौरान दाल, खाद्य तेल, दूध, चीनी और चावल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों में लगातार तेजी दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से कीमतों में तेजी का दौर शुरू हुआ। यही वह समय था, जब अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच तनाव और संघर्ष बढ़ा था, जिसका असर वैश्विक कमोडिटी बाजार और भारत की खाद्य कीमतों पर भी पड़ा।

दाल और तेल में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

पिछले पांच महीनों में सबसे ज्यादा तेजी दालों और खाद्य तेलों में रही।

चना दाल: 4.65 रुपए प्रति किलो महंगी
अरहर दाल: 5.96 रुपए प्रति किलो महंगी
उड़द दाल: 5.71 रुपए प्रति किलो महंगी
मूंग दाल: 4.55 रुपए प्रति किलो महंगी
खाद्य तेल: करीब 6 रुपए तक महंगा
सरसों तेल: 7.56 रुपए प्रति लीटर महंगा
दूध, चीनी और चावल भी हुए महंगे
दूध: 3 रुपए प्रति लीटर महंगा
चीनी: 2.25 रुपए प्रति किलो महंगी
चावल: 1.57 रुपए प्रति किलो महंगा
नमक: 0.85 रुपए प्रति किलो महंगा

चीनी महंगी होने की क्या है वजह?

विशेषज्ञों के मुताबिक, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की लगातार बढ़ती मांग है। इसके साथ ही चीनी का उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहने से बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

आटा क्यों रहा लगभग स्थिर?

दूसरी ओर, गेहूं की सरकारी खरीद बेहतर रहने और पर्याप्त सरकारी भंडार उपलब्ध होने से बाजार में गेहूं की सप्लाई बनी रही। यही वजह है कि आटे की कीमतों में सिर्फ मामूली बढ़ोतरी हुई।

अगस्त से त्योहारी सीजन बढ़ा सकता है महंगाई

विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त से शुरू होने वाला त्योहारी सीजन खाद्य वस्तुओं की मांग बढ़ा सकता है। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली के दौरान दाल, खाद्य तेल, चीनी और अन्य खाद्य उत्पादों की खपत बढ़ती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में नरमी नहीं आई और आयात लागत ऊंची बनी रही, तो आने वाले महीनों में दाम और बढ़ सकते हैं।

कमजोर मानसून भी बड़ी वजह

दालों की कीमतों में तेजी के पीछे इस बार कमजोर और असमान मानसून को भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। जुलाई के आखिर तक खरीफ दालों की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 7 फीसदी कम रहा। इससे उत्पादन घटने और आयात बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जिसका असर बाजार में कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

ईरान संकट और वैश्विक बाजार का भी असर

इंफोमेरिक रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा के अनुसार, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों पर अभी भी दबाव बना हुआ है। उन्होंने बताया कि कमजोर मानसून के कारण दालों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।

वहीं भारत खाद्य तेलों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल और सोया ऑयल की कीमतों में तेजी, साथ ही पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण आयात लागत बढ़ गई है। इसी वजह से घरेलू बाजार में खाद्य तेल और दालों की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।