पानीपत। डेढ़ साल की बच्ची ने अभी ठीक से बोलना और चलना भी नहीं सीखा, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में वह हर महीने 50 हजार रुपये कमाती है। परिवार पहचान पत्र (फैमिली ID) में हुई इस अजीबोगरीब गड़बड़ी ने पानीपत के एक गरीब परिवार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बच्ची के नाम 50 हजार रुपये मासिक यानी 6 लाख रुपये सालाना आय दर्ज होने के बाद परिवार का राशन कार्ड ही बंद हो गया।

मामला पानीपत के माता चौक क्षेत्र के वार्ड नंबर 11 का है। यहां रहने वाले प्रदीप कश्यप चद्दरों की कटिंग का काम करते हैं। उनका कहना है कि परिवार की वास्तविक मासिक आय महज 12 से 14 हजार रुपये है। परिवार में पत्नी गुड्डी, 7 साल का बेटा मितांश और डेढ़ साल की बेटी शगुन है।

22 गज के मकान में रहता है परिवार, कागजों में बेटी की लाखों की कमाई

प्रदीप के अनुसार, उनका परिवार करीब 22 गज के छोटे से मकान में रहता है। मकान में तीन पोर्शन बने हुए हैं, जिनमें ऊपर के दो हिस्से कच्ची कड़ियों की छत वाले हैं। इतनी सीमित आमदनी में परिवार का गुजारा मुश्किल से चलता है।

लेकिन जब प्रदीप ने अपनी फैमिली ID का रिकॉर्ड चेक कराया तो उसमें उनकी डेढ़ साल की बेटी शगुन की मासिक आय 50 हजार रुपये दर्ज मिली। यानी सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक बच्ची की सालाना आय 6 लाख रुपये है। वहीं, प्रदीप की वार्षिक आय भी रिकॉर्ड में 1.50 लाख रुपये दिखाई गई है।

बच्ची की आय ने छीना परिवार का राशन

परिवार का कहना है कि फैमिली ID में दर्ज इस गलत आय के कारण उनका परिवार राशन कार्ड की पात्रता से बाहर हो गया। फरवरी से उन्हें सरकारी राशन मिलना बंद हो गया। पहले राशन मिलने से परिवार को काफी राहत मिलती थी, लेकिन अब गेहूं और अन्य जरूरी सामान बाजार से खरीदना पड़ रहा है।

प्रदीप का कहना है कि जिस बच्ची के नाम 50 हजार रुपये महीने की आय दिखाई गई है, वह अभी महज डेढ़ साल की है। परिवार ने इस रिकॉर्ड को पूरी तरह गलत बताते हुए इसे ठीक कराने की मांग की है।

उसी मकान में भाई को मिल रहा राशन

इस मामले में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। प्रदीप का शादीशुदा भाई भी इसी 22 गज के मकान के ऊपरी हिस्से में अपने परिवार के साथ रहता है। उसका राशन कार्ड सक्रिय है और उसे सरकारी राशन मिल रहा है। वहीं, प्रदीप के परिवार का राशन कार्ड बंद कर दिया गया।

परिवार का कहना है कि वास्तविक आर्थिक स्थिति देखकर आसानी से पता लगाया जा सकता है कि वे राशन के पात्र हैं, लेकिन फैमिली ID में दर्ज गलत जानकारी के कारण उन्हें सरकारी सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है।

DC से CM विंडो तक शिकायत, फिर भी नहीं हुआ समाधान

प्रदीप ने फैमिली ID में सुधार के लिए पानीपत के DC कार्यालय में दो बार लिखित शिकायत दी। इसके बाद मुख्यमंत्री शिकायत निवारण पोर्टल (CM विंडो) पर भी शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि कई बार अधिकारियों ने मौके पर जांच किए बिना ही रिपोर्ट तैयार कर शिकायत का निपटारा कर दिया।

प्रदीप का कहना है कि वह पिछले कई महीनों से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी फैमिली ID में दर्ज गलत आय ठीक नहीं की गई और न ही राशन कार्ड बहाल हुआ।

सरकार से गुहार- गलती की सजा परिवार को क्यों?

12 से 14 हजार रुपये महीने की कमाई में चार सदस्यों का परिवार चलाने वाले प्रदीप ने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि बेटी शगुन के नाम दर्ज 50 हजार रुपये की गलत आय को तुरंत हटाया जाए, फैमिली ID दुरुस्त की जाए और राशन कार्ड बहाल कर परिवार को सरकारी राशन उपलब्ध कराया जाए।

परिवार का कहना है कि अगर गलती सरकारी रिकॉर्ड में है तो उसकी सजा एक गरीब परिवार को क्यों दी जा रही है? अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई कर परिवार को राहत देता है।

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