सोहराब आलम/चिरैया (पूर्वी चंपारण)। समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव की दीवारें अक्सर प्रेमियों के मिलन में बाधक बनती हैं लेकिन कभी-कभी मानवता और सामाजिक सूझबूझ इन दीवारों को गिरा देती है। चिरैया प्रखंड के सिरौना पंचायत स्थित ग्राम कचहरी से एक ऐसी ही सुखद तस्वीर सामने आई है जहां अलग-अलग जाति से होने के कारण परिवारों द्वारा नकारे गए एक प्रेमी जोड़े को ग्राम कचहरी के पंचों ने न केवल आश्रय दिया बल्कि हिंदू रीति-रिवाज से उनका विवाह संपन्न कराकर उन्हें सामाजिक मान्यता भी दिलाई।

​पांच वर्षों से चल रहा था प्रेम प्रसंग

​मामला शिवहर जिले के श्यामपुर भटहां थाना क्षेत्र के नयागांव घुरघुर टोला का है। यहां के रहने वाले अभ्यास कुमार और मुन्नी कुमारी पिछले पांच वर्षों से एक-दूसरे के प्रेम में थे। दोनों का सपना एक साथ जीवन बिताने का था लेकिन दोनों के परिवार उनके अलग-अलग जाति के होने के कारण इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। परिवार के विरोध के चलते प्रेमियों का जीना मुहाल हो गया था।

​पहले की थी मंदिर में शादी, फिर भी नहीं मिला हक

​परिस्थितियों से हार न मानते हुए 22 मई को इस प्रेमी जोड़े ने घर से भागकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित एक मंदिर में विवाह कर लिया। हालांकि जब वे वापस लौटे तो उनके परिजनों ने इस विवाह को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। सामाजिक दबाव और परिवार की नाराजगी के बीच प्रेमी जोड़ा बेसहारा हो गया था।

​ग्राम कचहरी ने दिखाई राह

​अंततः न्याय और सामाजिक स्वीकृति की उम्मीद में यह जोड़ा सिरौना ग्राम कचहरी पहुंचा। मामला सामने आने पर ग्राम कचहरी के पंचों ने स्थिति की गंभीरता को समझा। दोनों पक्षों की सहमति उपलब्ध साक्ष्यों और प्रेमी जोड़े के बालिग होने की पुष्टि के बाद पंचों ने एक बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने इस रिश्ते को सामाजिक मान्यता देने का फैसला किया।

​पंचों की मौजूदगी में हुआ मिलन

​ग्राम कचहरी के परिसर में एक भावुक क्षण देखने को मिला। पंचों को साक्षी मानकर अभ्यास कुमार ने मुन्नी कुमारी की मांग में सिंदूर भरा और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया। विवाह संपन्न होने के बाद नवविवाहित जोड़े ने कहा कि वे अब समाज और परिवार के विवादों से दूर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे। इस अनूठे विवाह की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है जहां लोग ग्राम कचहरी के इस सराहनीय कदम की प्रशंसा कर रहे हैं।