टोक्यो में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2026 के दौरान जापान की संसद तक श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश पहुँचाया गया। यह आयोजन भारत और जापान के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

कृष्ण कुमार सैनी,  चंडीगढ़। भारत की सनातन सांस्कृतिक विरासत और श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक संदेश को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में टोक्यो में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव (आईजीएम)-2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर उभरा है। इस आयोजन ने न केवल भारतीय संस्कृति और अध्यात्म की वैश्विक स्वीकार्यता को नई मजबूती दी, बल्कि भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया।

महोत्सव के दौरान जापान की राष्ट्रीय संसद (डाइट) के सदस्यों, प्रमुख राजनीतिक नेताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों को श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियां भेंट की गईं। इस अवसर को भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिसके माध्यम से सनातन दर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्व समुदाय तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्य, नेतृत्व, नैतिकता और मानवता का वैश्विक मार्गदर्शक ग्रंथ है। यही कारण है कि गीता के विचार आज दुनिया के विभिन्न देशों में अध्ययन और शोध का विषय बन चुके हैं। जापान जैसे तकनीकी रूप से विकसित राष्ट्र में गीता के संदेश को मिले सम्मान को भारत की आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2026 के माध्यम से भारत ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिक विकास और आध्यात्मिक मूल्यों का समन्वय ही मानवता के भविष्य का मार्ग है। कार्यक्रम में भारत-जापान संबंधों को केवल आर्थिक और रणनीतिक सहयोग तक सीमित न रखते हुए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक साझेदारी को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि जापान की संसद के सदस्यों तक श्रीमद्भगवद्गीता का पहुंचना केवल एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक है। यह आयोजन आने वाले समय में भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को और मजबूत करेगा तथा विश्व मंच पर सनातन संस्कृति और गीता के संदेश को व्यापक पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।