अभिषेक सेमर, तखतपुर। किसानों को निर्धारित मात्रा में खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर रोक लगाने भारत सरकार द्वारा शुरू की गई इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) की निगरानी में लाखासार सेवा सहकारी समिति का एक मामला सामने आया है। पोर्टल में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार समिति से एक बड़े किसान को नियमों के विपरीत एक ही बार में 50 बोरी यूरिया खाद वितरण किया गया है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र के किसानों में आक्रोश है। किसानों ने शाखा प्रभारी भागबली यादव को हटाने की मांग की है। वहीं कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
सूत्रों के अनुसार लाखासार सेवा सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले गांवों में किसानों को कृषि सीजन के दौरान खाद वितरण किया जाता है। इस बीच IFMS पोर्टल में दर्ज आंकड़ों के आधार पर यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया। पोर्टल की रिपोर्ट मिलने के बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई। चार सदस्यीय टीम गठित कर पूरे मामले की पड़ताल कराई गई।


जांच टीम ने किया परीक्षण
कैलाश कश्यप सीईओ सहकारिता, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आर.एल. पैकरा, कृषि विकास अधिकारी आलोक सिन्हा तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी कुमार धर साहू की चार सदस्यीय टीम ने दस्तावेजों और पोर्टल रिकॉर्ड का परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि एक बड़े किसान को नियमों के विपरीत एक ही बार में 50 बोरी यूरिया खाद जारी किया गया है। जांच पूरी होने के बाद प्रतिवेदन तैयार किया गया। अब यह प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर आगामी कार्रवाई तय होगी।

किसानों ने उठाए सवाल
मामला सामने आने के बाद लाखासार, पेंडारी, बिनौरी, विंध्यासर, काठाकोनी, खजुरी नवागांव सहित समिति से जुड़े गांवों के किसानों ने खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। किसानों का कहना है कि कई बार जरूरत होने पर उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पाती, जबकि कुछ बड़े किसानों को नियमों के विपरीत अधिक मात्रा में खाद दिए जाने की जानकारी सामने आई है। किसानों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

छह गांवों के किसानों की जरूरतों से जुड़ी है समिति
लाखासार सेवा सहकारी समिति के माध्यम से पेंडारी, बिनौरी, विंध्यासर, काठाकोनी, खजुरी नवागांव और लाखासार सहित छह गांवों के किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराया जाता है। समिति में प्रतिवर्ष लगभग छह हजार बोरी यूरिया का आवंटन होता है। ऐसे में खाद वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे हजारों किसानों को प्रभावित कर सकती है।
क्या बोले कृषि विभाग के अधिकारी?
इस मामलेे में कृषि विकास अधिकारी आलोक सिन्हा ने बताया कि IFMS पोर्टल के माध्यम से खाद वितरण की लगातार निगरानी की जाती है। किसी किसान को निर्धारित मानकों से अधिक खाद जारी किए जाने की स्थिति में इसकी सूचना स्वतः विभाग तक पहुंचती है। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर जांच की गई है। जांच प्रतिवेदन तैयार कर लिया गया है। प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को सौंपा जाएगा, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शाखा प्रभारी ने बताया तकनीकी त्रुटि
वहीं लाखासार समिति के शाखा प्रभारी भागबली यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कंप्यूटर ऑपरेटर की त्रुटि के कारण 50 बोरी यूरिया का टोकन कट गया था। किसानों को खाद नहीं दिए जाने या किसी प्रकार की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप पूरी तरह निराधार है। समिति में आने वाले किसानों को नियमानुसार खाद उपलब्ध कराया जा रहा है।
क्या है IFMS पोर्टल?
भारत सरकार द्वारा उर्वरक वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए IFMS पोर्टल संचालित किया जा रहा है। यह पोर्टल देशभर के शासकीय एवं निजी खाद विक्रेताओं के पॉस मशीनों से सीधे जुड़ा हुआ है। किसी भी किसान को खाद वितरण होने पर उसका पूरा रिकॉर्ड तत्काल पोर्टल में दर्ज हो जाता है। निर्धारित सीमा से अधिक खाद वितरण या किसी प्रकार की अनियमितता होने पर इसकी रिपोर्ट स्वतः उच्च अधिकारियों तक पहुंच जाती है।
कार्रवाई पर टिकी किसानों की नजर
जांच प्रतिवेदन तैयार होने के बाद अब किसानों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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