Dharm Desk – भोलेनाथ की भक्ति में सावन का महीना बहुत खास माना जाता है। इस दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और हर कोई अपने-अपने तरीके से शिवजी को खुश करने में लगा रहता है। बहुत बार देखा जाता है कि शिवलिंग के सामने लोग आरती या पूजा के समय ताली बजाते हैं। कुछ इसे भक्ति का हिस्सा मानते हैं तो कुछ परंपरा। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर समय ताली बजाना सही है या ताली बजाने के भी कुछ नियम हैं जिनका पालन करना बहुत जरूरी माना गया है।

ताली बजाने की पौराणिक मान्यता
मंदिर में ताली बजाने की परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है।ऐसा कहा जाता है कि जब भक्त भगवान के दरबार में पहुंचता है तो ताली या घंटी की आवाज के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। यह एक तरह से भगवान को पुकारने का संकेत होता है। इसके अलावा ताली की आजवा को वातावरण शुद्ध करने वाला भी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इससे आसपास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।
क्या है तीन ताली का नियम
यूं ही नहीं बनाई गई तीन ताली की परंपरा ज्योतिष और पौराणिक मन्यताओं में तीन ताली बजाने का बहुत खास महत्व बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि यह कोई सामान्य क्रिया नहीं बल्कि एक प्रतीकात्मक प्रक्रिया है। पुरानी कथाओं में यह भी इसका जिक्र मिलता है कि भोलेनाथ को खुश करने के लिए विशेष विधियों का पालन किया जाता था। जिनमें ध्वनि के माध्यम से ध्यान को आकरशीत करना भी शामिल था। इसलिए बिना सोचे-समझे ताली बजाने के बजय नियम का पालन करना आवश्यक माना गया हैं।
जानिए तीन तालियों का अलग-अलग अर्थ
- पहली ताली को ईश्वर के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का सकेत माना जाता है।
- दूसरी ताली के जरिए श्रद्धालु अपनी इच्छा ईश्वर के सामने प्रकट करता है और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करता है।
- तीसरी ताली को समर्पण का प्रतीक माना गया है।
जिसमें मनुष्य खुद को पूरी तरह भगवान शंकर के चरणों में सौंप देता है। यह परक्रिया भक्ति को एक क्रम और अनुशासन देती है जिसे कई लोग अपनाते हैं।
कब ताली बजाना गलत है
जहां एक ओर ताली बजाने के फायदे बताए गए हैं,वहीं कुछ स्थितियों में इसे अनुचित भी माना गया है। खासकर शिवलिंग के बहुत पास जाकर तेज ध्वनि में ताली बजाना या शोर करना अच्छा नहीं माना जाता। भगवान शंकर को ध्यान और साधना का देवता माना जाता है। इसलिए उनके सामने शांति बनाए रखना जरूरी है। ऐसा न करने पर भक्ति का भाव कमजोर पड़ सकता है और पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता।
श्रद्धालुओ के लिए सावधानी
अगर आप भी शंकर मंदिर जाते हैं तो भक्ति के साथ मर्यादा का पालन करना भी जरूरी है। जलाभिषेक करते समय शांत रहें और मन ही मन ओमवी नमः शिवाय का जाप करें। आरती के समय सामूहिक रूप से ताली बजाना ठीक माना जाता है, लेकिन व्यक्तिगत पूजा में शांति रखना बेहतर होता है। छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से पूजा अधिक असरदाई बनती है और मन को भी सच्ची शांति मिलती है।


