Business Desk – ईरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल कर अपनी साइबर और सैन्य क्षमताओं को तेजी से मजबूत कर रहा है. एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरानी समूह पश्चिमी AI टूल्स जैसे ChatGPT, Gemini और अन्य बड़े भाषा मॉडल का उपयोग साइबर हमलों, ऑनलाइन जासूसी और सैन्य योजना बनाने में कर रहे हैं. इस खुलासे के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में चिंता बढ़ गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से जुड़े साइबर ऑपरेटर AI टूल्स की मदद से फिशिंग अभियान अधिक प्रभावी बना रहे हैं. इसके अलावा दुर्भावनापूर्ण कोड तैयार करने, नकली ऑनलाइन पहचान बनाने, अनुवाद, रिसर्च और संवेदनशील सैन्य जानकारियों के विश्लेषण जैसे कार्यों में भी AI का उपयोग किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे साइबर हमलों की गति और क्षमता दोनों बढ़ सकती हैं.
प्रतिबंधों के बीच विकसित कर रहा अपना AI सिस्टम
रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान अपनी घरेलू AI क्षमताओं को भी विकसित कर रहा है. देश में एक राष्ट्रीय AI प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जिसे वैश्विक इंटरनेट से स्वतंत्र रूप से संचालित करने की दिशा में विकसित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है.
ड्रोन और सैन्य रणनीति में भी AI की भूमिका
ईरान में प्रकाशित शोध पत्रों और तकनीकी अध्ययनों में ड्रोन मार्गदर्शन, युद्धक्षेत्र में निर्णय लेने, लक्ष्य पहचान और पूर्वानुमान आधारित सैन्य रणनीतियों में AI के उपयोग पर काम होने के संकेत मिले हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य के संघर्षों में AI केवल साइबर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सैन्य अभियानों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है.
अमेरिकी एजेंसियों की बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजराइल को आशंका है कि भविष्य में किसी भी टकराव की शुरुआत पारंपरिक मिसाइल हमलों के बजाय बड़े पैमाने पर AI-संचालित साइबर हमलों से हो सकती है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और स्वचालित साइबर अभियानों के जरिए महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है.
AI कंपनियां रोकने की कोशिश में
OpenAI और Google जैसी कंपनियां अपने AI मॉडलों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय लागू कर रही हैं.हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंधित समूह अक्सर नई पहचान और तकनीकी तरीकों का उपयोग कर इन सुरक्षा व्यवस्थाओं को दरकिनार करने की कोशिश करते हैं.
क्या है सबसे बड़ी चिंता?
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी चिंता यह है कि AI अब केवल टेक्नोलॉजी उद्योग तक सीमित नहीं है. इसका उपयोग साइबर युद्ध, सूचना युद्ध, जासूसी और सैन्य रणनीति जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में भविष्य के संघर्षों में डिजिटल मोर्चा पारंपरिक युद्ध जितना ही महत्वपूर्ण हो सकता है.
ध्यान देने वाली बात
उपलब्ध रिपोर्टों में यह दावा नहीं किया गया है कि ChatGPT या Gemini सीधे किसी “ईरानी सेना” को संचालित कर रहे हैं. रिपोर्ट में मुख्य रूप से AI टूल्स के उपयोग से साइबर और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की बात कही गई है. “Pentagon in panic” जैसे शब्द वीडियो शीर्षक का हिस्सा हैं, लेकिन इनके समर्थन में स्वतंत्र आधिकारिक प्रमाण रिपोर्ट में नहीं दिए गए हैं.

