पुरी: पवित्र जलक्रीड़ा एकादशी के अवसर पर पुरी के दोलमंडप साही, जेनारीगछ छक स्थित मां रामचंडी मंदिर में माता की विशेष ‘जलशायी नीति’ (जल अभिषेक की रस्म) श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई. भीषण गर्मी से राहत और शीतलता के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले इस उत्सव में भारी संख्या में भक्तों ने हिस्सा लिया.
परंपरा के अनुसार, सुबह माता के कपाट खुलने के बाद मंगला आरती और अवकाश नीति संपन्न की गई. इसके बाद ‘शंखुड़ी भोग’ लगाया गया. जलशायी नीति की शुरुआत माता के आसन पर मिट्टी का लेप लगाकर की गई. इसके बाद पास के एक कुएं से पवित्र जल लाया गया. इस जल में चंदन, अगुरु, कपूर, चुआ, केसर और कई प्रकार के सुगंधित द्रव्यों का मिश्रण किया गया, जिससे माता का जलाभिषेक किया गया.
दोपहर के समय जल निकासी के बाद, मां रामचंडी को अत्यंत सुंदर चंदन वेश से सुसज्जित किया गया. शाम की आरती के बाद माता को विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाया गया और फिर रात्रि ‘पहुड़’ (शयन) नीति संपन्न हुई.
मंदिर के पुजारी पिनाक दाश और सोमनाथ दाश ने माता के सभी नीति-नियमों को विधि-विधान से पूरा किया. स्थानीय क्षेत्र के भक्तों ने माता के इस दुर्लभ चंदन वेश और जलशायी नीति के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया. मंदिर परिसर पूरे दिन भक्तिमय वातावरण और जयकारों से गूंजता रहा.

