Jammu- Kashmir Politics Crisis: जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस में फूट (Split in National Conference) पड़ डगई है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) के 19 विधायक बागी रूख अपना लिया है। इन नेताओं ने शुक्रवार को श्रीनगर में एक विधायक के घर में बैठक की। नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के 19 नाराज विधायकों ने सीएम मर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की मांग वाला प्रस्ताव तैयार किया है। बागी विधायक उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव चाहते हैं। इसके साथ ही वे उमर अब्दुल्ला के दो करीबी नेताओं को भी अहम जिम्मेदारियों से हटाने की मांग की है।
बागी विधायकों ने दो साल पूरे कर चुके मंत्रियों को हटाने, क्षेत्रीय संतुलन के आधार पर नए सिरे से जिम्मेदारी देने सहित कई मांगें रखी है। नाराज विधायकों का कहना है कि सरकार और पार्टी में फैसले लेने का तरीका बदला जाना चाहिए। वे चाहते हैं कि मंत्रिमंडल में जगह केवल योग्यता के आधार पर मिले।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और छह बार के विधायक मुबारक गुल ने पार्टी के सामने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्हें महासचिव का पद देने की पेशकश की गई थी, लेकिन इसके बावजूद वे असंतुष्ट हैं। उनके समर्थक नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि मुबारक गुल पार्टी से इस्तीफा दे दें। मुबारक गुल ने अभी किसी भी मुद्दे पर कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। लेकिन मुबारक गुल के बेटे यूनुस गुल ने कहा कि मैं यहां जो कुछ भी कहूंगा, वह एक बेटे के तौर पर नहीं, बल्कि एक ब्लॉक सचिव के तौर पर कहूंगा।
बागी विधायकों की मांग क्या है
बागी विधायकों की नाराजगी हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ी है। दरअसल, 27 अक्टूबर को हुए विस्तार में अली मोहम्मद सागर, शमीमा फिरदौस, मीर सैफुल्लाह और अल्ताफ कालू को मंत्री बनाया गया था। इसके बाद कुछ वरिष्ठ विधायक खुद को नजरअंदाज किए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। बागी विधायकों ने प्रस्ताव में मांग की है कि जिन मंत्रियों को पद संभाले दो साल हो चुके हैं, उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया जाए। उनकी जगह नए विधायकों को मौका दिया जाए। विधायकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में जिम्मेदारियां बांटते समय योग्यता और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखा जाना चाहिए। बागी विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के दो करीबी नेताओं नासिर असलम वानी और सांसद शम्मी ओबेरॉय को हटाने की मांग भी रखी है।

नाराज विधायकों ने 4 घंटे की बैठक
विधायक कैसर जमशेद लोन के घर करीब चार घंटे तक बैठक हुई। इसमें जम्मू और कश्मीर, दोनों क्षेत्रों के 19 विधायक शामिल हुएष बैठक में नाराजगी से जुड़ा एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को सौंपने की तैयारी हैष इस बैठक में वरिष्ठ नेता मुबारक गुल भी शामिल हुए थे। उन्हें हाल ही में पार्टी का महासचिव बनाया गया था। अब उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि अक्टूबर में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद नहीं मिलने के बाद उन्होंने पार्टी का पद लेने से भी इनकार कर दिया था।
बीजेपी का दावा- कभी भी गिर सकती है सरकार
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रही इस खींचतान पर भाजपा ने दावा किया कि उमर अब्दुल्ला सरकार कभी भी गिर सकती है। बीजेपी का दावा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के 16 विधायक नाखुश हैं और उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार जल्द ही गिर जाएगी। रिष्ठ भाजपा नेता और प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा, ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जिस तरह से अपनी कैबिनेट का विस्तार किया, उससे पार्टी के अंदर की कलह सबके सामने आ गई है। फेरबदल के बाद कुछ विधायक दुखी हैं, कुछ नाराज हैं और कई प्रमुख नेता निराश हो गए हैं।
उमर अब्दुल्ला ने किया था कैबिनेट विस्तार
बता दें कि उमर अब्दुल्ला के सुझाव पर अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीम फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी (कल्लू) को यहां लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मंत्रिमंडल में शामिल किए गए चारों नेता कश्मीर से हैं। इस विस्तार के बाद दो साल पुरानी सरकार की मंत्रिपरिषद में घाटी का प्रतिनिधित्व बढ़ गया है। अब नौ-सदस्यीय मंत्रिमंडल में सात मंत्री कश्मीर से हैं जबकि उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और जावेद राणा जम्मू क्षेत्र के मात्र दो प्रतिनिधि हैं। गौरतलब है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की 90-सदस्यीय विधानसभा में कानूनी तौर पर तय 10 प्रतिशत की सीमा के अनुसार, मंत्रिपरिषद में अधिकतम नौ मंत्री हो सकते हैं। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सभी मंत्रियों ने फेरबदल की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री को औपचारिक रूप से अपने इस्तीफे सौंप दिए थे।
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