पटना। जन सुराज पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बिहार सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा प्रहार किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की वित्तीय योजनाएं पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
कर्ज का बढ़ता बोझ और नई उधारी की तैयारी
जन सुराज के प्रदेश प्रवक्ता विवेक कुमार ने बताया कि बिहार पर पहले से ही करीब 3.70 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके बावजूद, सरकार अब 12,000 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने की तैयारी में है। पार्टी का दावा है कि कुल कर्ज अब 4 लाख करोड़ के करीब पहुंच चुका है, जिससे राज्य की आर्थिक नींव हिल गई है।
प्रतिदिन 100 करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज में स्वाहा
पार्टी के अनुसार, इस विशाल कर्ज के कारण सरकार को हर साल लगभग 40,000 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में देने पड़ रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि बिहार की जनता की गाढ़ी कमाई का प्रतिदिन करीब 100 करोड़ रुपये केवल ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। इससे विकास कार्यों के लिए फंड की भारी कमी हो गई है।
लोकलुभावन वादे और फिस्कल डेफिसिट का संकट
विवेक कुमार ने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए सरकार ने बिना किसी ठोस प्लानिंग के मुफ्त बिजली और वेतन वृद्धि जैसे लोकलुभावन वादे किए। आज राज्य का राजकोषीय घाटा 12 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान से काफी ऊपर है। सरकार स्थिति को सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही है, लेकिन हकीकत में खजाना खाली है।
योजनाओं और कर्मचारियों पर पड़ रहा असर
वित्तीय कुप्रबंधन का सीधा असर राज्य के कर्मचारियों और छात्रों पर दिख रहा है। पार्टी का दावा है कि न तो समय पर वेतन मिल पा रहा है और न ही छात्रवृत्तियां जारी हो रही हैं। वरिष्ठ नेता कैप्टन राजीव ने कहा कि इसका सबसे बुरा प्रभाव गरीब, वृद्ध और दिव्यांगों पर पड़ा है, क्योंकि सामाजिक सुरक्षा योजनाएं बजट की कमी से ठप हो रही हैं।
विकास और रोजगार पर मंडराता खतरा
जन सुराज ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही ठोस आर्थिक नीति नहीं बनाई और केंद्रीय सहायता पर निर्भरता कम नहीं की, तो राज्य में बेरोजगारी और अराजकता बढ़ सकती है। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि वह राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करे।
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