सोहराब आलम, मोतिहारी। ​बिहार की राजनीति में विधान परिषद (MLC) चुनावों को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने सियासी समीकरण साधने और समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं। इसी कड़ी में, प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने भी अपनी चुनावी हलचल तेज कर दी है। मोतिहारी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जनसुराज के नेताओं ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निवर्तमान विधान पार्षद (MLC) असफाक अहमद की जीत का दावा करते हुए चुनावी मैदान में पार्टी के उतरने का ऐलान किया।

​एनडीए-महागठबंधन को चुनौती

​प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जनसुराज के नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस बार बिहार की सभी आठ शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की एमएलसी सीटों पर पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि जनसुराज कई सीटों पर न केवल कड़ा मुकाबला पेश करेगी, बल्कि शानदार जीत भी दर्ज करेगी।
​वर्तमान राजनीतिक समीकरणों पर कटाक्ष करते हुए जनसुराज के प्रवक्ताओं ने कहा कि इस समय सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी महागठबंधन दोनों के भीतर ही आपसी मतभेद और अंतर्कलह चरम पर है। इन दोनों बड़े गठबंधनों के बीच मचे घमासान का सीधा फायदा जनसुराज समर्थित उम्मीदवारों को मिलेगा, जिससे दोनों ही गठबंधनों के प्रत्याशियों के सामने इस चुनाव में एक कड़ी और अप्रत्याशित चुनौती खड़ी हो गई है।

​असफाक अहमद के कार्यों का बखान

​जनसुराज नेताओं ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी असफाक अहमद के पिछले कार्यकाल की सराहना की। उन्होंने कहा कि असफाक अहमद ने सड़क से लेकर विधान परिषद के सदन तक हमेशा शिक्षकों के अधिकारों और उनकी समस्याओं के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाई है।
​नेताओं ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कार्यकाल में उन्हें अपने कार्यों को धरातल पर उतारने के लिए बहुत कम समय मिला था, फिर भी उन्होंने शिक्षकों के हक में उल्लेखनीय प्रयास किए। पार्टी ने विश्वास दिलाया कि यदि इस बार शिक्षक उन्हें दोबारा चुनकर सदन में भेजते हैं, तो शिक्षकों की लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान और उन्हें सातवें वेतनमान का पूरा लाभ दिलाने के लिए और अधिक प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।
​इस प्रकार, जनसुराज के इन दावों और आक्रामक रुख से सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। देखना यह होगा कि शिक्षक मतदाता इस बार किस पर अपना भरोसा जताते हैं।