समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर बुलडोजर चलाने के आदेश पर मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट ने फिलहाल रोक बरकरार रखी है। सोमवार को दोनों पक्षों के बीच करीब पौने दो घंटे चली विस्तृत बहस के बाद कोर्ट ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि अंतरिम आदेश जारी रहेगा।
रामपुर। स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने के आदेश पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट से राहत मिली है। सोमवार को हुई अहम सुनवाई में कोर्ट ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर पहले से लागू अंतरिम रोक को आगे भी बरकरार रखने का फैसला सुनाया।
आरडीए ने घोषित किया था अवैध
रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने यूनिवर्सिटी परिसर में बने 38 भवनों के नक्शे स्वीकृत न होने का हवाला देकर उन्हें अवैध ठहराया था। इसके बाद प्राधिकरण की ओर से इन निर्माणों को ढाने का आदेश जारी कर दिया गया था। आरडीए के इस कदम के खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट में अपील दाखिल की थी, जहां से उन्हें पहले भी अंतरिम राहत मिली हुई थी।
पौने दो घंटे तक चली जोरदार बहस
सोमवार को इस मामले पर कमिश्नर कोर्ट में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच करीब पौने दो घंटे तक बहस हुई। यूनिवर्सिटी की तरफ से पैरवी कर रहे वकील जुनैद एजाज ने दलील दी कि जिस सीघनखेड़ा गांव में यह यूनिवर्सिटी बनी है, वह 27 सितंबर 2024 को आरडीए के दायरे में शामिल हुआ है। ऐसे में नियमानुसार प्राधिकरण को कोई भी दंडात्मक कदम उठाने से पूर्व मास्टर प्लान और जोनल विकास योजना तैयार करनी चाहिए थी।
नियमों के बिना कार्रवाई का आरोप
यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता का कहना था कि जब तक ये योजनाएं और संबंधित नियम प्रभावी नहीं हो जाते, तब तक किसी भी निर्माण को अवैध ठहराना कानूनन सही नहीं है। उन्होंने आरडीए के कारण बताओ नोटिस और पूरी प्रक्रिया को समय से पहले व गैर-कानूनी बताया। दूसरी ओर, आरडीए के वकीलों ने अपने ध्वस्तीकरण के फैसले को सही ठहराया।
कोर्ट का अगला आदेश आने तक राहत
मामले की सुनवाई के बाद यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता ने बताया कि मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया है कि भवनों के ध्वस्तीकरण पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी। जब तक अदालत का अगला आदेश नहीं आ जाता, तब तक किसी भी भवन को नहीं तोड़ा जाएगा। हालांकि, अगली सुनवाई के लिए अभी कोई तिथि घोषित नहीं की गई है और इसका निर्धारण कोर्ट का विस्तृत आदेश जारी होने के बाद ही होगा।


