मनुष्य का वास्तविक व्यक्तित्व उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से प्रकट होता है. आमतौर बड़े और महत्वपूर्ण कार्य पूरी सावधानी, सोच-विचार, चैतन्यता और सजगता के साथ किया जाता है. ऐसे कार्यों में व्यक्ति अक्सर स्वयं को वैसा प्रस्तुत करने में सफल हो जाता है जैसा वह समाज के समक्ष दिखना चाहता है. किंतु जब वही मनुष्य बेध्यानी या अनजाने में कोई कार्य करता है तब उस पर ध्यान दीजिए क्योंकि इस समय उसके भीतर के असल संस्कार और विचार सहज रूप से सामने आते हैं.
“Actions reveal intentions” इस अंग्रेज़ी provervb का भावार्थ यही है कि कर्म ही व्यक्ति के वास्तविक इरादों और स्वभाव का परिचय देता है. जीवन में किसी व्यक्ति को परखने के लिए उसके छोटे-छोटे व्यवहारों पर ध्यान देना बहुत आवश्यक क्योंकि यही बातें उसके व्यक्तित्व का सच्चा दर्पण होती हैं.
“हर आदमी में होते हैं दस-बीस आदमी, जिसको भी देखना हो कई बार देखना.” प्रसिद्ध शायर निदा फ़ाज़ली का यह शेर याद रखने जैसा है. हर व्यक्ति का व्यक्तित्व बहुआयामी होता है उसे महज कुछ मुलाकातों से नहीं समझा जा सकता. अलग-अलग परिस्थितियों में उसके क्रिया कलापों को देखकर ही उसके विचारधारा और व्यक्तित्व को समझा जा सकता है. एक प्रसिद्ध सुभाषित है-
यथा चित्तं तथा वाचो यथा वाचस्तथा क्रिया. चित्ते वाचि क्रियायां च साधूनामेकरूपता॥
जिसका अर्थ है केवल सज्जन के मन, वचन और कर्म में एकरूपता होती है.

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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