अक्सर सफलता और असफलता के बीच का फ़ासला बहुत थोड़ा होता है। दौड़ की प्रतियोगिता में प्रथम और द्वितीय स्थान पाने वाले धावकों की क्षमता में अंतर बेहद मामूली होता है। जो छोटा-सा अंतर परिणाम बदल देता है, हमें उस पर ही काम करने की आवश्यकता है। जीवन में आमूलचूल परिवर्तन करने से बचते हुए सिर्फ़ उस छोटी-सी कमी की पहचान करें जो हमें अव्वल बनने से रोक रही है।

अंग्रेज़ी का एक फ़ेमस proverb “If it ain’t broke, don’t fix it.” तो यही कहता है जो चीज़ खराब नहीं है उसे ठीक करने की कोशिश मत करो। इसी बात को जीवन में भी लागू किया जा सकता है। अपनी किसी कमी को दूर करने के लिए स्वयं को पूरी तरह बदल डालना समझदारी नहीं है। कोई भी मनुष्य परिपूर्ण नहीं होता लेकिन इसका यह अर्थ भी नहीं कि उसमें सब कुछ सुधारने के लायक़ है।

एक छोटे-से नट के निकल जाने से एक विशाल वाहन रुक सकता है। एक छोटे-से फ़्यूज के जल जाने से एक विशाल हवेली अंधेरे में डूब सकती है और आंख में पड़ा एक छोटा-सा तिनका रातों की नींद हराम कर सकता है। बड़ी समस्या की वजह भी बड़ी हो यह आवश्यक नहीं। कई बार हमारी छोटी सी लापरवाही हमारी सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।

श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक “उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।” का संदेश भी यही है कि मनुष्य को स्वयं के प्रयास से स्वयं को ऊपर उठाना चाहिए।
स्वयं को पूरी तरह नकारने के बजाय स्वयं को निखारिए। जो थोड़ा सा बुरा है उसके लिए जो बहुत कुछ अच्छा है उसे मत बदलिए। एक बंद पड़ी गाड़ी का कोई एक छोटा सा पुर्ज़ा ही बदल कर उसे फिर से सड़क में दौड़ा दिया जाता है। केवल उसे सुधारिए जो बिगड़ गया है। बेहतर जीवन खुद को पूरी बदल देना नहीं बल्कि खुद में छिपी उस छोटी-सी कमी को पहचान लेना है जो आपको बड़ी सफलता तक पहुँचने नही दे रही है।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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