“एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव कभी भी हृदय से मिटाया नहीं जा सकता” इसके लिए एक प्रसिद्ध अँग्रेज़ी कहावत है “The influence of a good teacher can never be erased.” गुरु वह दीप है जो स्वयं जलकर विद्यार्थियों का जीवन प्रकाशित करता है। “एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थी के मन में आशा जगा सकता है, कल्पनाशीलता को प्रज्वलित कर सकता है और सीखने के प्रति प्रेम पैदा कर सकता है। इसके लिए कहा गया है “A good teacher can inspire hope, ignite the imagination, and instill a love of learning.”

विश्व स्तर पर शिक्षक दिवस की शुरुआत यूनेस्को और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के द्वारा 1994 में की गई। गुरुओं को मान देने का भाव मूल रूप से समूचे विश्व में भारत से ही विस्तारित हुआ है। वैश्विक शिक्षक दिवस 1966 में शिक्षकों की स्थिति, अधिकारों और जिम्मेदारियों से संबंधित यूनेस्को-आईएलओ को अपनाए जाने की याद में मनाया जाता है। भारत में राष्ट्रीय शिक्षक दिवस 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस पर मनाया जाता है, जबकि 5 अक्टूबर को विश्व शिक्षक दिवस मानाते हैं, आज वही दिन है। वास्तव में शिक्षक वह कुम्हार है जो विद्यार्थी के व्यक्तित्व को आकार देकर उसके जीवन की दिशा बदलता है।

“गुरु बिनु भवनिधि तरइ न कोई।
जो बिरंचि संकर सम होई॥”

इस चौपाई का भावार्थ है व्यक्ति चाहे कितना ही ज्ञानी या सामर्थ्यवान क्यों न हो गुरु के मार्गदर्शन के बिना जीवन के कठिन भवसागर को पार करना असम्भव है । गुरु को सम्मान देने या उनका स्मरण करने के लिए कलेंडर का कोई एक दिन काफी नही बल्कि इसके लिए एक जीवन कम होना चाहिए।

“The mediocre teacher tells. The good teacher explains. The superior teacher demonstrates. The great teacher inspires.” इस प्रसिद्ध अँग्रेज़ी proverb का अर्थ है: “औसत शिक्षक विद्यार्थी को बताता है, अच्छा शिक्षक समझाता है, श्रेष्ठ शिक्षक प्रदर्शित (करके) दिखाता है और महान शिक्षक प्रेरित करता है।” शिक्षक वह मार्गदर्शक है जो विद्यार्थी के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानकर उसे सही दिशा देता है।

आचार्यात् पादमादत्ते पादं शिष्यः स्वमेधया।
पादं सब्रह्मचारिभ्यः पादं कालक्रमेण च॥

इस संस्कृत सुभाषित का अर्थ है विद्यार्थी अपने ज्ञान का एक भाग गुरु से, एक अपनी बुद्धि से, एक सहपाठियों से और एक अनुभव से प्राप्त करता है। भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा में गुरु को जीवन के हर मार्ग का पथप्रदर्शक माना गया है। “Teaching is the profession that teaches all the other professions.” अर्थात् अध्यापन वह पेशा है जो अन्य सभी पेशों के सम्बन्ध मे सिखाता है और उनका आधार तैयार करता है। अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाली इस महा -शक्ति के प्रति आदर, स्नेह और श्रद्धा की भारतीय परंपरा ने ज्ञान को चरित्र निर्माण और जीवन निर्माण का माध्यम माना है। “Education is the most powerful weapon which you can use to change the world.” इस पंक्ति का अर्थ है “शिक्षा वह शक्तिशाली हथियार है जिसके प्रयोग से दुनिया को बदला जा सकता है ।”

सा विद्या या विमुक्तये। संस्कृत के इस पंक्ति में कहा भी गया है कि वही विद्या सार्थक है जो मनुष्य को अज्ञान और बंधनों से मुक्त करे। अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
 अज्ञान के अंधकार में ज्ञान का प्रकाश देने वाले गुरु को प्रणाम।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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