झज्जर जिले और आसपास के इलाकों में वर्षों से अनुपयोगी पड़े कुएं जहरीली गैसों के जमाव के कारण इंसानों के लिए घातक साबित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बंद जलस्रोतों में जैविक कचरा सड़ने से हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें बनती हैं।
झज्जर। जिले समेत ग्रामीण व शहरी इलाकों में लंबे समय से बंद पड़े पुराने कुएं और जलस्रोत इंसानों के लिए बेहद खतरनाक ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो रहे हैं। रखरखाव के अभाव और वर्षों तक इस्तेमाल न होने के कारण इन बंद कुओं के भीतर ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियां बन जाती हैं, जो पल भर में किसी की भी जान ले सकती हैं।
स्वास्थ्य व तकनीकी विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी पुराने या उपयोगहीन कुएं में बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के उतरना सीधा मौत को निमंत्रण देना है। ऐसे स्थानों पर बचाव कार्य अथवा सफाई हेतु प्रवेश करने से पहले ऑक्सीजन सिलेंडर और गैस मास्क का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
जहरीली गैसें बनने की वजह
जब कोई कुआं लंबे समय तक ढका या बंद रहता है, तो उसमें पेड़-पौधों की पत्तियां, मृत जीव-जंतु और अन्य जैविक सामग्रियां गिरती रहती हैं। पर्याप्त धूप व हवा न मिलने के कारण यह कचरा तली में जमा होकर सड़ने लगता है। इस प्रक्रिया के दौरान बिना ऑक्सीजन के पनपने वाले बैक्टीरिया कचरे को विघटित करते हैं, जिससे कई प्राणघातक गैसों का निर्माण होता है।
इनमें मुख्य रूप से हाइड्रोजन सल्फाइड बनती है, जिसकी गंध सड़े हुए अंडे जैसी होती है और जो सूंघने की क्षमता खत्म कर तुरंत बेहोश कर देती है। इसके अलावा ज्वलनशील मीथेन गैस ऑक्सीजन के स्तर को गिरा देती है, जिससे विस्फोट का खतरा रहता है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड सांस लेने के लिए आवश्यक हवा को पूरी तरह खत्म कर देती है।
मानव शरीर पर प्रभाव
कुएं की गहराई में ऑक्सीजन का स्तर शून्य तक पहुंच जाता है, जिससे वहां उतरते ही व्यक्ति का दम घुटने लगता है। ये जहरीली गैसें सीधे मानव तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती हैं, जिसके लक्षणों में चक्कर आना, उल्टी होना और दृष्टि धुंधली होना शामिल हैं।
हाइड्रोजन सल्फाइड का उच्च सांद्रण इतना घातक होता है कि सांस लेते ही कुछ ही सेकंडों में फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं। ऐसी स्थिति में आपातकालीन डॉक्टरी सहायता पहुंचने से पहले ही पीड़ित की मृत्यु हो जाती है, इसलिए सुरक्षा उपकरणों और गैस दबाव की जांच के बिना कुएं में उतरना वर्जित है।


