उड़ान योजना के तहत विकास कार्य पूरा, राज्यसभा में केंद्र सरकार ने दी जानकारी; हजारीबाग और डाल्टनगंज परियोजना भूमि विवाद में अटकी
रांची। झारखंड के हवाई यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान) के तहत बोकारो और दुमका हवाई अड्डों का विकास कार्य पूरा हो चुका है। अब इन दोनों एयरपोर्ट से नियमित वाणिज्यिक उड़ानें शुरू करने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही राज्य के यात्रियों को रांची और देवघर के अलावा दो नए एयरपोर्ट का विकल्प मिलेगा।
केंद्र सरकार के अनुसार, झारखंड में उड़ान योजना के तहत बोकारो, दुमका, जमशेदपुर, देवघर, हजारीबाग और डाल्टनगंज को शामिल किया गया है। इनमें देवघर और जमशेदपुर से पहले ही नियमित हवाई सेवाएं संचालित हो रही हैं, जबकि बोकारो और दुमका एयरपोर्ट संचालन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
रांची एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव होगा कम
बोकारो और दुमका से उड़ानें शुरू होने के बाद कोयलांचल, संताल परगना और आसपास के जिलों के यात्रियों को बड़े शहरों तक पहुंचने में काफी सुविधा मिलेगी। इससे रांची एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव भी कम होने की उम्मीद है और व्यापार, उद्योग, पर्यटन व चिकित्सा यात्रा को भी नई गति मिलेगी।
हालांकि, हजारीबाग और डाल्टनगंज के लोगों को अभी इंतजार करना होगा। केंद्र सरकार ने बताया कि इन दोनों एयरपोर्ट परियोजनाओं के लिए राज्य सरकार की ओर से अब तक आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसी वजह से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है और दोनों क्षेत्रों के लोग फिलहाल सड़क और रेल मार्ग पर ही निर्भर हैं।
विकास के लिए अब तक ₹122.04 करोड़ हो चुके हैं स्वीकृत
केंद्र सरकार ने बताया कि झारखंड में हवाई अड्डों के विकास के लिए अब तक ₹122.04 करोड़ स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से ₹117.61 करोड़ खर्च भी किए जा चुके हैं। वहीं, 4 जुलाई 2026 से लागू उड़ान योजना के नए संस्करण के तहत अगले दस वर्षों में देशभर के 120 नए या कम सेवा वाले हवाई अड्डों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे करीब चार करोड़ लोगों को किफायती हवाई यात्रा का लाभ मिलेगा।यह जानकारी केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब के दौरान दी।


