Jharkhand Tribal Woman Hostage in Dubai: ‘झारखंड की बेटी’ दुबई में बंधक बनाई गई है। मानव तस्करों ने आदिवासी महिला मोनिका कच्छप (tribal woman Monika Kachhap) को नर्सिंग नौकरी का झांसा देकर शारजाह ले गया। इसके बाद वहां पहुंचते ही पासपोर्ट छीनकर बंधक बना लिया। परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार से बेटी की सुरक्षित वापसी की मांग की है।

दरअसल पूरा मामला झारखंड की राजधानी रांची के छोटा घाघरा इलाके का है। पिता रतना कच्छप की शिकायत के आधार पर एयरपोर्ट थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। 29 सितंबर 2026 को दर्ज की गई इस FIR में दुबई और अजमान में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी, मानव तस्करी, बंधक बनाने, जबरन मजदूरी कराने और रंगदारी मांगने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक रांची के छोटा घाघरा इलाके की रहने वाली मोनिका कच्छप (उम्र 37 साल) ने रांची के बुंडू से साढ़े तीन साल का नर्सिंग का कोर्स पूरा किया था। मोनिका के पिता रतना कच्छप की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और परिवार का गुजारा खेती-किसानी से ही चलता है। परिवार की बदहाली और गरीबी को देखते हुए मोनिका ने नौकरी करने का फैसला किया था। इसी दौरान वो ऑनलाइन माध्यम से ‘AMD Trend Solution LLC’ नाम की एक एजेंसी और उसकी एजेंट प्रियंका के संपर्क में आई। एजेंसी की एजेंट प्रियंका ने मोनिका को दुबई में अच्छी नौकरी दिलाने का लालच दिया। साथ ही विदेश में रहने, खाने और आवास सुविधाएं मिलने का झूठा भरोसा दिया। झांसे में आकर मोनिका ने 22 अप्रैल 2026 को प्रियंका के बताए गए बैंक खाते में फोनपे के जरिए 5 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। आगे की यात्रा और एयर टिकट की व्यवस्था एजेंसी ने खुद किया। इसके बाद 5 मई 2026 को मोनिका दिल्ली एयरपोर्ट से शारजाह के लिए रवाना हो गई।

शारजाह पहुंचते ही शुरू हुआ जुल्म 

मोनिका के शारजाह पहुंचते ही खेल शुरू हो गया। 6 मई को जब वो शारजाह उतरी, तो एजेंसी की तरफ से भेजे गई गाड़ी के ड्राइवर ने उसका ओरिजिनल पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद 7 मई को उसे अजमान स्थित एजेंसी के एक दफ्तर में ले जाया गया। वहां रितेश और मोहम्मद मेराज अंसारी नाम के लोगों ने अरबी भाषा में लिखे कुछ दस्तावेजों पर जबरन उसके साइन और अंगूठे के निशान ले लिए। मोनिका अरबी भाषा बिल्कुल नहीं जानती थी, इसलिए उन कागजातों में क्या लिखा था। आरोप है कि उसका मोबाइल फोन लेकर प्रियंका के साथ हुई उसकी सारी व्हाट्सएप चैट भी डिलीट कर दी गई। इसके बाद एक वीडियो कॉल के जरिए उसे धमकाया गया कि उसने एजेंसी से 2600 दिरहम का कर्ज लिया है। उसे चेतावनी दी गई कि अगर 25 मई तक उसने ये रकम नहीं चुकाई, तो उसे जेल भेज दिया जाएगा।

बंधक बनाकर झाड़ू-पोछा, बर्तन और बाथरूम साफ करवाए गए

परिवार वालों के मुताबिक मोनिका को मोहम्मद मेराज अंसारी के घर ले जाया गया. वहां उसे लगभग एक महीने तक बंधक बनाकर झाड़ू-पोछा, बर्तन और बाथरूम साफ करने जैसे काम करवाए गए। इसके बाद 22 जून को उसे बिना किसी वैध वर्क परमिट के एक दूसरे घर में घरेलू देखभाल के काम के लिए भेज दिया गया। मोनिका वहां की भाषा नहीं समझती थी, इसलिए काम में परेशानी होने पर उसे अगले दिन वापस दफ्तर छोड़ दिया गया।

सरकार और विदेश मंत्रालय से गुहार

परिवार ने अब राज्य की हेमंत सोरेन सरकरा और विदेश मंत्रालय से बेटी की सुरक्षित वापसी की मांग की है। पीड़ित परिवार और स्थानीय ग्रामीण अब बस यही अपील कर रहे हैं कि सरकार जल्द से जल्द उनकी बेटी मोनिका को सुरक्षित उनके घर वापस ले आए।

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